परिवहन मंत्रालय का कर्मचारी बन पूर्व IAS से 1.91 लाख रुपये ठगे

नवभारत टाइम्स

नोएडा में एक रिटायर्ड आईएएस को ई-चालान के नाम पर ठगा गया। साइबर जालसाजों ने परिवहन मंत्रालय का कर्मचारी बनकर संपर्क किया। उन्होंने क्रेडिट कार्ड की जानकारी लेकर खाते से 1.91 लाख रुपये निकाल लिए। पीड़ित ने साइबर थाने में मामला दर्ज कराया है। पुलिस जांच कर रही है।

former ias duped of 191 lakh by impersonating ministry of transport employee new cyber fraud trap
नोएडा के सेक्टर-15ए में रहने वाले एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी ठगी का शिकार हो गए। साइबर जालसाजों ने ई-चालान के बहाने उनके क्रेडिट कार्ड से 1.91 लाख रुपये उड़ा दिए। यह घटना 29 दिसंबर को तब शुरू हुई जब पीड़ित को ओवरस्पीडिंग का चालान मैसेज मिला, और 5 जनवरी को जालसाजों ने उनसे संपर्क कर जुर्माने की रकम जमा कराने के नाम पर उनके क्रेडिट कार्ड की जानकारी ले ली और पैसे ट्रांसफर कर लिए।

रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जगमोहन लाल बजाज ने पुलिस को बताया कि 29 दिसंबर को उन्हें एक मैसेज मिला जिसमें बताया गया था कि उनकी गाड़ी का ओवरस्पीडिंग का चालान कटा है। मैसेज में जल्दी जुर्माना भरने की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बाद, 5 जनवरी को कुछ ठगों ने खुद को परिवहन मंत्रालय का कर्मचारी बताया। उन्होंने पीड़ित से उनकी कार का नंबर पूछा और बताया कि चालान की राशि 500 रुपये है।
पीड़ित ने जब जुर्माने की रकम अपने अमेरिकन एक्सप्रेस क्रेडिट कार्ड से भरने के लिए अपनी जानकारी साझा की, तो ठगों ने उन्हें एक लिंक भेजा। उन्होंने उस लिंक पर क्लिक करवाया। कुछ ही देर बाद, पीड़ित को अपने मोबाइल पर मैसेज मिला कि उनके क्रेडिट कार्ड से 1 लाख 91 हजार 417 रुपये कट गए हैं। यह देखकर वे तुरंत चौंक गए।

उन्होंने फौरन अपने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया और उन्हें पूरी बात बताई। इसके बाद, उन्होंने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्ट पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। यह घटना साइबर ठगी के बढ़ते मामलों की ओर इशारा करती है, जहां आम लोग आसानी से जालसाजों का शिकार बन जाते हैं।

यह पूरा मामला ई-चालान के नाम पर की गई धोखाधड़ी का है। ठगों ने पहले तो पीड़ित को चालान का डर दिखाया और फिर उसे भरने के बहाने उनकी क्रेडिट कार्ड की सारी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद, उन्होंने पीड़ित को एक लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा, जो शायद एक फिशिंग लिंक था। इस लिंक के जरिए उन्होंने पीड़ित के खाते से बड़ी रकम निकाल ली। यह घटना हमें सिखाती है कि हमें किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए और अपनी वित्तीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए, खासकर जब वह किसी अनजाने स्रोत से आई हो।