मीठी गोलियां

नवभारत टाइम्स

होम्योपैथी की मीठी गोलियां लोगों को इतनी पसंद आ रही हैं कि वे इन्हें खाने के बाद मीठे के तौर पर खा रहे हैं। मेडिकल स्टोर कम क्लिनिक पर ऐसे ही मजेदार किस्से देखने को मिल रहे हैं। डॉक्टर की जगह नए लोग गोलियां खा रहे हैं।

sweet pills the sweet truth of homeopathy or a bitter experience
होम्योपैथी की गोलियों के मीठे स्वाद ने लोगों को उन्हें खाने की आदत डाल दी है, जो अब एक बड़ी समस्या बन गई है। हाल ही में एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे लेखक ने देखा कि लोग न सिर्फ बीमारियों के इलाज के लिए बल्कि एनर्जी के लिए भी इन मीठी गोलियों का सेवन कर रहे हैं। वहां मौजूद लोगों ने गोलियां खाते हुए एनर्जी मिलने की बात कही, जबकि अंग्रेजी दवाओं के कड़वे स्वाद और साइड इफेक्ट्स का जिक्र किया। इस दौरान मेडिकल स्टोर पर मरीजों के बीच अजीबोगरीब बातचीत भी सुनने को मिली, जिसमें एक मरीज को चाय पीने के बाद होने वाली जलन के बारे में पूछा जा रहा था, लेकिन जवाब कब्ज की शिकायत वाली एक अन्य महिला दे रही थी। इस हास्यास्पद स्थिति से बचने के लिए लेखक को वहां से निकलना पड़ा।

होम्योपैथी की गोलियों के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह नहीं है कि चार गोलियां निकालने पर छह आ जाती हैं या वापस शीशी में डालने पर एक अतिरिक्त चली जाती है। असली समस्या यह है कि ये गोलियां मीठी होती हैं। लोग इन्हें खाने के बाद कुछ मीठा खाने के अंदाज में खाने लगे हैं। पिछले कुछ महीनों से लोग होम्योपैथी के इतने मुरीद हो गए हैं कि लगभग हर बीमारी का समाधान इसी से ढूंढ रहे हैं।
हाल ही में लेखक एक मेडिकल स्टोर कम क्लिनिक पर कुछ समस्या लेकर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि एक नए डॉक्टर कुर्सी पर बैठे थे। पूछने पर पता चला कि वह मेडिकल स्टोर वाले के मित्र हैं। वह साहब शीशियां निकालकर कुछ गोलियां खा रहे थे। मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, "जब भी यहां आते हैं एनर्जी के लिए ये गोलियां खा जाते हैं।" उन्होंने अंग्रेजी दवाओं की तुलना करते हुए कहा, "अंग्रेजी दवा की दुकान पर यह सुख कहां, हर दवा कड़वी और सबका साइड इफेक्ट।"

लेखक डॉक्टर साहब का इंतजार करने के लिए बाकी लोगों के साथ बैठ गए। उनके बगल में बैठे एक सज्जन, जिनकी शक्ल तीतर जैसी थी, उन्हें ब्राजीलियन तोतों की नस्लें गिनाने लगे। एक दूसरे व्यक्ति उन्हें प्लॉट बेचने की कोशिश करने लगे। जो लोग मीठी गोलियां खा रहे थे, वे सब मूड में आ गए और कविताएं सुनाने लगे। पूरा मेडिकल स्टोर लोगों से भर गया।

इसी बीच, मेडिकल स्टोर वाला किसी मरीज से फोन पर बात कर रहा था, जिसे चाय पीने के बाद जलन होती थी। उसी समय एक मैडम कब्ज दूर करने की दवा मांगने आईं। उन्हें दवा दे दी गई। इतने में स्टोर वाले ने फोन पर पूछा, "जलन चाय पीने पर होती है या फ्रेश होते समय होती है?" लेकिन जवाब दुकान पर मौजूद मैडम ने दिया। बोलीं, "जलन नहीं होती केवल कब्ज की शिकायत है।" लेखक ने इशारे से मैडम को समझाया कि उनसे नहीं पूछा जा रहा है। मैडम भी समझ गईं और शरमा गईं।

उधर स्टोर वाले ने फिर पूछा, "तो जलन कब होती है?" मैडम से फिर रहा नहीं गया और बोलीं, "जलन नहीं होती केवल कब्ज होती है।" लेखक को लगा कि अगर वे थोड़ी देर और वहां रुके तो उन्हें दस्त हो जाएंगे। इसलिए, "आते हैं" कहकर वे घर भाग आए। यह घटना होम्योपैथी की मीठी गोलियों के प्रति लोगों के बढ़ते क्रेज और उसके कारण होने वाली अजीबोगरीब स्थितियों को दर्शाती है।