रवि काना की तलाश में नेपाल बॉर्डर पर पहुंची पुलिस टीम

नवभारत टाइम्स

स्क्रैप माफिया रवि काना बांदा जेल से रिहा होने के बाद से लापता है। पुलिस की छह टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं। एक टीम नेपाल बॉर्डर पर डेरा डाले हुए है। रवि काना पर अवैध वसूली और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर आरोप हैं। उसकी रिहाई के बाद उसके गिरोह के सदस्य फिर से सक्रिय हो सकते हैं।

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नोएडा: बांदा जेल से 29 जनवरी को रिहा हुआ स्क्रैप माफिया रवि काना पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है। पुलिस की छह टीमें उसे ढूंढने के लिए बांदा, दिल्ली और नेपाल बॉर्डर तक खाक छान रही हैं। रवि काना पर अवैध वसूली, जमीन पर कब्जा, धमकी देना और मारपीट जैसे कई गंभीर आरोप हैं। उसकी रिहाई के वक्त उसके परिवार के लोग जेल पहुंच चुके थे, लेकिन अब उनके मोबाइल भी बंद आ रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रवि काना जेल से निकलने के बाद किस गाड़ी में बैठकर गया। उसके गिरोह के सदस्य भी फिर से सक्रिय हो सकते हैं, इसलिए पुलिस उन पर भी पैनी नजर रखे हुए है।

पुलिस के मुताबिक, रवि काना हरियाणा और राजस्थान में भी स्क्रैप के ठेके जबरन लेता था। इसके लिए उसने कई राज्यों में अपने गुर्गे पाल रखे थे। जेल से निकलने के बाद से ही रवि काना का कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस की टीमें हर संभावित ठिकाने पर दबिश दे रही हैं। एक टीम तो नेपाल बॉर्डर के पास भी डेरा डाले हुए है, ताकि रवि काना देश छोड़कर भाग न सके।
स्क्रैप माफिया रवि काना पर सिर्फ स्क्रैप का कारोबार करने का आरोप नहीं है, बल्कि वह इस आड़ में अवैध वसूली भी करता था। जमीन पर कब्जा करना और लोगों को धमकी देना भी उसके काम का हिस्सा था। मारपीट और संगठित अपराध से जुड़े कई गंभीर मामले उस पर दर्ज हैं।

जब रवि काना जेल से छूटा, तो उसके परिवार के लोग पहले से ही वहां मौजूद थे। यह बात पुलिस के लिए भी थोड़ी हैरानी वाली है। लेकिन अब परिवार के ज्यादातर लोगों के मोबाइल नंबर बंद आ रहे हैं, जिससे पुलिस के लिए उनसे संपर्क करना मुश्किल हो रहा है।

पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि रवि काना जेल से निकलने के बाद किस गाड़ी में बैठकर गया। इस जानकारी से उसे ढूंढने में काफी मदद मिल सकती है। पुलिस इस मामले में हर एंगल से जांच कर रही है।

यह भी आशंका जताई जा रही है कि रवि काना के जेल से निकलने के बाद उसके गिरोह के सदस्य फिर से सक्रिय हो सकते हैं। इसलिए पुलिस उसके साथियों पर भी कड़ी नजर रख रही है। कहीं ऐसा न हो कि रवि काना के बाहर आते ही उसका गिरोह फिर से अपना आतंक फैलाना शुरू कर दे।