सीवर लाइन डालने

नवभारत टाइम्स

सेक्टर-16 आईडीसी इलाके में सीवर और पानी की लाइन डालने का काम चल रहा है। सड़कों पर गड्ढे और कीचड़ के कारण लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। वाहन फंस रहे हैं और लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। बिजली दफ्तर हेट्री हाउस पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।

roads in sector 16 idc in a bad state due to sewer line work people facing severe problems
सेक्टर-16 आईडीसी इलाके में सीवर और वॉटर सप्लाई लाइन डालने के लिए खोदी गई सड़कों की हालत बारिश के कारण दलदल जैसी हो गई है। जिम्मेदारों की लापरवाही से लोग कीचड़ और गड्ढों में फंस रहे हैं, जिससे पैदल चलना और वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। इस औद्योगिक क्षेत्र में रोज़ाना आने-जाने वाले हजारों लोग, सर्विस सेंटर के कर्मचारी और ग्राहक इस समस्या से जूझ रहे हैं। डीएचबीवीएन के हेट्री हाउस तक पहुंचना भी एक चुनौती बन गया है। नगर निगम के एसडीओ सुमित कुमार के अनुसार, ढाई किमी लंबी सीवर और वॉटर सप्लाई लाइन डाली जा चुकी है और अब स्टॉर्म वाटर ड्रेन की लाइन डाली जानी है, जिसके बाद ढाई किमी का आरएमसी रोड बनाया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट का बजट 11 करोड़ रुपये है और काम दिसंबर 2026 तक पूरा होने का लक्ष्य है, हालांकि अधिकारियों का दावा है कि इसे जून तक पूरा कर लिया जाएगा।

निर्माणाधीन सड़कों की बदहाली ने सेक्टर-16 आईडीसी इलाके को कीचड़ का दलदल बना दिया है। सीवर और वॉटर सप्लाई लाइन बिछाने के लिए सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है। बारिश का पानी इन गड्ढों में भर गया है, जिससे पूरा इलाका दलदल में तब्दील हो गया है। लोगों का कहना है कि न तो वे पैदल चल पा रहे हैं और न ही उनके वाहन ठीक से निकल पा रहे हैं। कई बार तो गाड़ियां इन गड्ढों में बुरी तरह फंस जाती हैं।
इस औद्योगिक क्षेत्र में हर दिन बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। सर्विस सेंटर और वर्कशॉप में काम करने वाले कर्मचारी भी रोजाना इस समस्या से परेशान हैं। जो लोग अपनी गाड़ियां ठीक करवाने आते हैं, वे भी सर्विस सेंटर तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करते हैं। एक बार तो ऐसा हुआ कि एक वाहन चालक की गाड़ी दलदल में इतनी बुरी तरह फंस गई कि उसे वहीं कीचड़ में खड़ा करके खोलना पड़ा और वहीं मरम्मत करनी पड़ी।

निजी सर्विस सेंटर में काम करने वाले सतपाल वशिष्ठ ने बताया कि इलाके में काम तो चल रहा है, लेकिन लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही है। उन्होंने कहा, "न कोई सेफ्टी है और न ही रास्तों की सही जानकारी। एक बार अंदर चले जाएं तो समझ नहीं आता कि किस तरफ जाना है और बाहर कैसे निकलना है।" उन्होंने आगे कहा कि जगह-जगह सड़क खोदकर छोड़ दी गई है, जिससे बारिश के बाद यहां दलदल जैसे हालात हो गए हैं।

वाहन चालक शुभम ने भी अपनी परेशानी बताई। उन्होंने कहा कि वे गाड़ी सही करवाने आए थे, लेकिन सर्विस सेंटर तक पहुंच ही नहीं पाए। मजबूरी में उन्हें वापस लौटना पड़ा, लेकिन कीचड़ और गड्ढों के कारण इलाके से निकलना भी उनके लिए भारी पड़ गया।

इस बदहाली का असर डीएचबीवीएन के हेट्री हाउस (बिजली दफ्तर) तक पहुंचने पर भी पड़ रहा है। अधिकारियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए यहां पहुंचना एक चुनौती बन गया है। काम से जुड़े लोग रास्तों की बदहाली से जूझ रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे किसी तरह हेट्री हाउस तक पहुंच तो जाते हैं, लेकिन वहां से लौटना और भी बड़ी परेशानी का सबब बन जाता है।

नगर निगम के एसडीओ सुमित कुमार ने इस समस्या पर जानकारी देते हुए बताया कि इलाके में ढाई किमी लंबी सीवर लाइन और वॉटर सप्लाई लाइन डाली जा चुकी है। अब स्टॉर्म वाटर ड्रेन की लाइन डाली जानी है। इसके बाद ढाई किमी का आरएमसी (रेडिमेड कंक्रीट) रोड बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि काम का टेंडर अलॉट हो चुका है और काम जारी है। बारिश के समय दिक्कतें और बढ़ जाती हैं।

सुमित कुमार ने आगे बताया कि पूरे प्रोजेक्ट का बजट 11 करोड़ रुपये है। सीवर और वॉटर सप्लाई का काम करीब 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। बाकी काम दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि इसे जून तक ही पूरा कर लिया जाएगा।