कौशल विकास मिशन से जुड़े पुलिस परिवार, 18 वामा स्वावलंबन केंद्र शुरू

नवभारत टाइम्स

यूपी पुलिस के परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। वामा सारथी और उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने मिलकर 18 वामा स्वावलंबन केंद्रों का शुभारंभ किया है। इन केंद्रों पर पुलिसकर्मियों के परिवारीजनों को ब्यूटीशियन, डिजिटल मार्केटिंग जैसे कई कौशल सिखाए जाएंगे। यह पहल पुलिस परिवारों के आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ाएगी।

18 vama swavalamban kendras launched for up police families big step towards self reliance through skill development
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस के परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। वामा सारथी (उत्तर प्रदेश पुलिस फैमिली वेलफेयर असोसिएशन) और उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने मिलकर एक समझौता किया है। इसके तहत पुलिसकर्मियों के परिवारों को खास हुनर सिखाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। शुक्रवार को लखनऊ में एक कार्यक्रम में प्रदेश के 18 'वामा स्वावलंबन केंद्रों' का एक साथ उद्घाटन हुआ। यह योजना जल्द ही प्रदेश के सभी 75 जिलों में फैलाई जाएगी।

यह पहल पुलिस परिवारों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए है। इन केंद्रों पर ब्यूटीशियन, डिजिटल मित्र, सैंपल टेलरिंग, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स जैसे कोर्स सिखाए जाएंगे। अभी पहले चरण में 1,700 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के परिवार इन कोर्सों में हिस्सा ले रहे हैं। यह ट्रेनिंग बिल्कुल इंडस्ट्री के मानकों के हिसाब से होगी। कई बड़ी और जानी-मानी कंपनियां इसमें मदद कर रही हैं। इन कंपनियों के एक्सपर्ट ट्रेनर प्रैक्टिकल और मार्केट से जुड़ी ट्रेनिंग देंगे। इससे कोर्स खत्म होते ही लोगों को नौकरी या अपना काम शुरू करने के मौके मिलेंगे।
वामा सारथी की अध्यक्षा मीनाक्षी सिंह ने बताया कि यह कदम पुलिस परिवारों के लिए बहुत खास है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आर्थिक रूप से सुरक्षित होंगे। भविष्य में पुलिस लाइन इलाकों में ब्यूटी स्टूडियो, बुटीक, टेलरिंग यूनिट और डिजिटल सर्विस सेंटर खोलने की योजना है, जिन्हें पुलिस परिवार ही चलाएंगे। कौशल विकास विभाग ने भी पुलिस परिवारों की सुविधा के लिए नियमों में बदलाव किए हैं। पहले जहां कोर्स के लिए उम्र सीमा 18 से 35 साल थी, उसे बढ़ाकर 18 से 45 साल कर दिया गया है। इससे ज्यादा लोग इस ट्रेनिंग का फायदा उठा पाएंगे।

डीजीपी राजीव कृष्णा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जब पुलिसकर्मी अपने परिवार को सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस करते हैं, तभी वे प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और बेहतर तरीके से संभाल पाते हैं। उन्होंने कहा, "जब पुलिसकर्मी अपने परिवार को सुरक्षित और आत्मनिर्भर जानते हैं, तभी वे प्रदेश की कानून-व्यवस्था को बेहतर ढंग से संभाल सकते हैं।"

प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग डॉ. हरिओम ने 'वामा सारथी' के साथ इस तालमेल को एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा, "वामा सारथी’ के साथ इस समन्वय को एक ऐतिहासिक पहल बताया।"

यह योजना लखनऊ के अलावा वाराणसी, कानपुर नगर, प्रयागराज, आगरा, अलीगढ़, बांदा, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, बस्ती, गोंडा, झांसी, अयोध्या, मेरठ, मुजफ्फरनगर, आजमगढ़ और मीरजापुर में शुरू की गई है। इन केंद्रों पर पुलिस परिवारों को ऐसे हुनर सिखाए जाएंगे जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। इससे वे घर बैठे या अपना छोटा-मोटा काम शुरू करके अच्छी कमाई कर सकेंगे। यह कदम महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता दिलाने में भी मदद करेगा।

यह ट्रेनिंग सिर्फ हुनर सिखाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस परिवारों को समाज में एक नई पहचान बनाने का मौका भी देगी। जब परिवार के सदस्य आत्मनिर्भर बनेंगे, तो पुलिसकर्मियों पर काम का बोझ कम होगा और वे अपनी ड्यूटी और अच्छे से कर पाएंगे। यह एक ऐसा कदम है जो पूरे प्रदेश के लिए फायदेमंद साबित होगा। यह योजना पुलिस बल के मनोबल को भी बढ़ाएगी, क्योंकि उन्हें पता होगा कि उनके पीछे उनका परिवार भी मजबूत है।