रिश्वत लेने में गिरफ्तार एसआई को मिली ज़मानत

नवभारत टाइम्स

धौज थाने के सब इंस्पेक्टर सुमित कुमार को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। वह करीब दो महीने से न्यायिक हिरासत में थे। अब उन्हें अदालत से ज़मानत मिल गई है। उन पर 1.50 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप था। यह रिश्वत एक कंपनी के कर्मचारी को छोड़ने के एवज में मांगी गई थी।

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फरीदाबाद: रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए धौज थाने के पूर्व सब इंस्पेक्टर सुमित कुमार को आखिरकार जमानत मिल गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुधीर जीवन की अदालत ने उन्हें दो लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है। सुमित कुमार करीब दो महीने से न्यायिक हिरासत में थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, क्योंकि वे प्रोबेशन पीरियड पर थे। उन पर आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी नरेश कुमार के दबाव में उन्होंने रिश्वत मांगी थी।

यह पूरा मामला नवंबर 2023 से शुरू हुआ, जब एक कंपनी वाहनों में जीपीएस लगाने का काम कर रही थी। 8 सितंबर 2025 को धौज निवासी राहुल ने थाना धौज में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने कंपनी के कर्मचारी नफीस को गिरफ्तार कर लिया। शिकायतकर्ता मनोज कुमार का आरोप है कि इसके बाद थाना प्रभारी नरेश कुमार ने दबाव बनाया। उन्होंने महिला कर्मचारियों की गिरफ्तारी की धमकी दी और रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने कुल 16 लाख रुपये रिश्वत के तौर पर दिए।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप था कि बर्खास्त एसआई सुमित कुमार मुकदमे का चालान कोर्ट में नहीं दे रहा था। सुमित कुमार अपने लिए 50 हजार रुपये और एसएचओ नरेश कुमार के लिए 1 लाख रुपये की रिश्वत मांग रहा था। इस पर पीड़ित ने एसीबी अंबाला से शिकायत की। इसके बाद एसीबी की टीम ने एक योजना बनाई। 5 दिसंबर 25 को उन्होंने सुमित कुमार को 1.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

अदालत ने सुमित कुमार को दो लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब सुमित कुमार प्रोबेशन पीरियड पर थे। रिश्वतखोरी के आरोप में पकड़े जाने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था। यह मामला दर्शाता है कि कैसे पुलिस अधिकारी अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर सकते हैं और आम लोगों को परेशान कर सकते हैं। एसीबी की कार्रवाई से ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसी जा रही है। यह घटना आम जनता के लिए एक सबक है कि वे ऐसे मामलों में चुप न रहें और शिकायत करें।