बैंक में फर्ज़ी दस्तावेज़ लगाकर 17 लाख की धोखाधड़ी, तीन पर FIR

नवभारत टाइम्स

फरीदाबाद में सरकारी बैंक से 17 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। जनक सिंह नाम के एक व्यक्ति ने कार खरीदने के नाम पर फर्जी दस्तावेज लगाए। उसने कम कीमत की कार खरीदी और लोन लेकर फरार हो गया। बैंक अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

faridabad 17 lakh fraud from bank accused absconds after taking car loan on fake documents
फरीदाबाद में सरकारी बैंक से 17 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक व्यक्ति ने कार खरीदने के नाम पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर यह लोन लिया और फिर बिना एक भी किस्त भरे फरार हो गया। यूको बैंक की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना जून 2025 की बताई जा रही है।

यूको बैंक, एमआईडी कॉर्पोरेट शाखा, एनआईटी नीलम चौक के मुख्य प्रबंधक प्रताप सिंह कौशल ने पुलिस को बताया कि ग्रेटर फरीदाबाद के बीपीटीपी एलीट फ्लोर सेक्टर-75 खेड़ीकला के रहने वाले जनक सिंह ने 12 जून 2025 को कार लोन के लिए अप्लाई किया था। यह आवेदन ऑटोमोबाइल सेल्स एजेंट राहुल सिंह की मदद से हुआ था। बैंक में दिल्ली के प्रीत विहार स्थित टीआर साहनी ऑटोमोबाइल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक प्रोफार्मा इनवॉइस जमा किया गया था। इसमें ग्रैंड विटारा जेटा ईसीवीटी मॉडल की ऑन रोड कीमत 22 लाख 28 हजार 995 रुपये दिखाई गई थी। इस पर बैंक ने जनक सिंह को 17 लाख रुपये का कार लोन दे दिया। 23 जून 2025 को आरटीजीएस के जरिए यह रकम डीलर के खाते में ट्रांसफर भी कर दी गई।
लेकिन बाद में जब बैंक ने जांच की तो पता चला कि जनक सिंह ने टॉप मॉडल की जगह एक सस्ता और निचले मॉडल की कार खरीदी थी। इस कार की असली कीमत करीब 15 लाख 93 हजार 762 रुपये थी। यानी, आरोपी ने ज्यादा कीमत दिखाकर बैंक से ज्यादा लोन ले लिया।

बैंक अधिकारी ने बताया कि लोन देने से पहले जब उन्होंने जनक सिंह की दुकान और मकान की फिजिकल वेरिफिकेशन की थी, तब सब ठीक मिला था। बैंक के रिकॉर्ड भी सही थे। लेकिन जब आरोपी ने लोन की एक भी ईएमआई नहीं भरी और बैंक ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, तो उसका मोबाइल बंद मिला। जब बैंक कर्मियों ने उसकी दुकान और मकान की जांच की, तो वे भी बंद मिले।

बैंक अधिकारी के मुताबिक, आरोपी जनक सिंह ग्रेटर फरीदाबाद की बीपीटीपी सोसायटी में 24 हजार रुपये महीने के किराए पर रहता था। बैंक का आरोप है कि मुख्य आरोपी जनक सिंह, डीएसए राहुल सिंह और मोबाइल कंपनी के कर्मचारी टीआर साहनी ने मिलकर बैंक को गलत जानकारी दी और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ज्यादा लोन की रकम हासिल कर ली। इस तरह उन्होंने बैंक के साथ धोखाधड़ी की।

एनआईटी पुलिस ने बैंक अधिकारी की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी एनआईटी महावीर ने बताया कि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। यह पूरा मामला सरकारी बैंक को चूना लगाने का है, जिसमें आरोपी ने चालाकी से ज्यादा कीमत दिखाकर लोन लिया और फिर गायब हो गया। पुलिस अब आरोपी और उसके साथियों की तलाश कर रही है। इस तरह की धोखाधड़ी से बैंकों को भारी नुकसान होता है और आम लोगों के भरोसे पर भी सवाल उठता है। पुलिस की जांच से उम्मीद है कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।