चोक सीवर ने बिगाड़ी दिल्ली से सटे वॉर्ड-68 की सूरत

Contributed byila|नवभारत टाइम्स

बृज विहार के वॉर्ड-68 में सीवर जाम और अतिक्रमण ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। गंदा पानी घरों में घुस रहा है। सड़कों पर जाम लगता है, जिससे चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं। सार्वजनिक परिवहन की कमी से ऑटो चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं। आवारा कुत्तों का आतंक भी लोगों को परेशान कर रहा है।

brij vihar ward 68 people struggling with choked sewers encroachment and transportation issues
ब्रिज विहार, दिल्ली से सटा हुआ इलाका, इन दिनों कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। वार्ड-68 में बहने वाला बृज विहार नाला लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गया है। मुख्य सड़क पर नाले के ऊपर बने पुल से लेकर मदर डेरी तक अवैध कब्जे हैं, जिससे बुधवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार के दिन पूरा इलाका जाम हो जाता है। इस जाम की वजह से चोरी और छीना-झपटी जैसी घटनाएं बढ़ गई हैं। सी ब्लॉक की पहचान अब सीवर चौक से होने लगी है, क्योंकि हर हफ्ते लोग इस समस्या से परेशान हैं। घरों में गंदा पानी वापस आ रहा है। आवारा कुत्तों का आतंक भी इतना है कि लोग अक्सर उनके काटने का शिकार हो रहे हैं। सार्वजनिक यातायात की कमी के कारण दिल्ली, गाजियाबाद या मेट्रो स्टेशन जाने के लिए कोई सीधी सुविधा नहीं है। इस वजह से ई-रिक्शा और ऑटो वाले मनमाना किराया वसूलते हैं। ज्यादातर लोग दिल्ली में काम करते हैं, लेकिन उन्हें मेट्रो की सुविधा नहीं मिल पाती।

ब्रिज विहार के वार्ड-68 में बृज विहार नाला एक बड़ी मुसीबत बन गया है। इस नाले की वजह से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। मुख्य सड़क पर नाले के ऊपर बने पुल से लेकर मदर डेरी तक अवैध निर्माण हो रखे हैं। बुधवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार के कारण पूरा इलाका ठप्प हो जाता है। इस जाम की वजह से चोरी और झपटमारी की घटनाएं बढ़ गई हैं। सी ब्लॉक की पहचान अब सीवर चौक के नाम से होने लगी है। लोग हर हफ्ते इस समस्या से परेशान हैं। घरों में गंदा पानी वापस आ जाता है। आवारा कुत्तों का डर भी बहुत है, लोग अक्सर उनके काटने के शिकार हो रहे हैं।
यहां सार्वजनिक यातायात की भी भारी कमी है। दिल्ली, गाजियाबाद या मेट्रो स्टेशन जाने के लिए कोई सीधी बस या ट्रेन सेवा नहीं है। इस वजह से ई-रिक्शा और ऑटो वाले अपनी मनमानी करते हैं और ज्यादा किराया वसूलते हैं। बहुत से लोग दिल्ली में नौकरी करते हैं, लेकिन उन्हें मेट्रो की सुविधा नहीं मिल पाती।