NH-48 की मरम्मत का काम धीमा, हो रहे हादसे

नवभारत टाइम्स

दिल्ली-जयपुर हाइवे एनएच-48 पर मरम्मत का काम बेहद धीमा चल रहा है। धौलाकुंआ से खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक सड़क गड्ढों और टूटी रेलिंग से बदहाल है। लाखों वाहन रोजाना इस मार्ग से गुजरते हैं और आए दिन हादसे हो रहे हैं। सुरक्षा के नाम पर केवल कागजी तैयारी दिख रही है। एनएचएआई ने ठेकेदार को नोटिस जारी किया है।

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दिल्ली-जयपुर हाइवे (NH-48) पर लगातार दावों के बावजूद गड्ढे, टूटी रेलिंग और खराब लाइटें लोगों की जान का दुश्मन बनी हुई हैं। धौलाकुंआ से खेड़कीदौला टोल प्लाजा तक करीब 28 किलोमीटर का यह हिस्सा हादसों का अड्डा बन गया है। तीन महीने पहले मरम्मत के लिए 165 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी होने के बावजूद काम कछुए की चाल से चल रहा है। इसी लापरवाही का खामियाजा 55 वर्षीय राजेश कुमार को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा, जब जर्जर क्रैश बैरियर के कारण वह नाले में गिर गए। NHAI ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और लोगों की जान बचाने के लिए ठेकेदार के रिस्क व कॉस्ट पर दोबारा टेंडर निकाला है।

रोजाना लाखों वाहन इस हाइवे से गुजरते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूरी हो रही है। तीन महीने पहले सड़क की मरम्मत के लिए 165 करोड़ रुपये का एक बड़ा टेंडर जारी किया गया था। उम्मीद थी कि अब सड़क की सूरत बदल जाएगी और सफर सुरक्षित होगा। लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है। काम की रफ्तार इतनी धीमी है कि लोग आए दिन हादसों का शिकार हो रहे हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने जनवरी में वादा किया था कि अब मेटल के बजाय मजबूत कंक्रीट क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे। यह काम तुरंत शुरू होने वाला था। लेकिन फरवरी का महीना खत्म होने को है और कई जगहों पर अभी भी पुराने और टूटे हुए बैरियर ही लगे हुए हैं। इसी लापरवाही का एक भयानक उदाहरण राजेश कुमार की मौत है। 55 वर्षीय राजेश कुमार बुधवार शाम अपनी स्कूटी से ड्यूटी से घर लौट रहे थे। एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मारी और जर्जर क्रैश बैरियर के कारण वह सीधे नाले में जा गिरे। आस-पास के लोगों ने उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर उस जगह मजबूत कंक्रीट बैरियर लगे होते, तो शायद राजेश कुमार की जान बच जाती। यह पहली बार नहीं है जब इस हाइवे पर ऐसी घटना हुई है। एक साल पहले भी इसी नाले में गिरकर एक महिला की मौत हो गई थी। तब भी सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। पहले तो ठेकेदार बैंक गारंटी का बहाना बना रहा था, और अब नया टेंडर होने के बाद भी काम बहुत धीमा चल रहा है। सड़क पर गड्ढे और टूटी हुई रेलिंग हर दिन नए खतरे पैदा कर रही हैं।

लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि हादसों के बाद भी संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों बैठे हैं? करोड़ों रुपये का बजट पास होने के बावजूद सड़क पर कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। सवाल यह है कि आखिर कब तक लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजरते रहेंगे?

इस मामले पर NHAI के प्रॉजेक्ट डायरेक्टर आकाश पाधी ने कहा कि ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि लोगों की जान की परवाह करते हुए और उनकी समस्याओं को देखते हुए, ठेकेदार के रिस्क और कॉस्ट पर टेंडर दोबारा निकाल दिया गया है। इसका मतलब है कि अगर ठेकेदार काम पूरा नहीं करता है, तो उसका नुकसान उसी का होगा और NHAI किसी और से काम करवाएगा।