Csir cdris Platinum Jubilee Research Should Be For The Needs Of Common People
‘शोध आम लोगों की ज़रूरत के लिए हों’
नवभारत टाइम्स•
सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान ने अपनी 75वीं वर्षगांठ मनाई। इस अवसर पर वैज्ञानिकों ने आम लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने वाले शोध पर बल दिया। संस्थान ने बायोफार्मा क्षेत्र में नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की बात कही। वर्चुअल हर्बेरियम का अनावरण हुआ और महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (CSIR-CDRI) ने अपनी 75वीं 'प्लैटिनम जुबली' मनाई। इस मौके पर वैज्ञानिकों ने तालमेल और नवाचार पर जोर दिया। CSIR की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि भारतीय विज्ञान को अलग-अलग विषयों और संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने के लिए बायोफार्मा क्षेत्र में नए विचारों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की बात कही। पद्मश्री डॉ. अभय बंग ने ' पीपुल्स रिसर्च ' पर बोलते हुए कहा कि शोध का असली मकसद समाज की जरूरतों को पूरा करना है। इस समारोह में CDRI के 'वर्चुअल हर्बेरियम' का भी उद्घाटन हुआ और चार अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
लखनऊ में CSIR-CDRI ने अपना 75वां स्थापना दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया। इस खास मौके पर देश भर के जाने-माने वैज्ञानिक और विशेषज्ञ संस्थान में इकट्ठा हुए। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, CSIR की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने सभी वैज्ञानिकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में भारतीय विज्ञान को अलग-अलग विषयों और संस्थानों के बीच तालमेल बिठाने पर ध्यान देना चाहिए। डॉ. कलैसेल्वी ने इस बात पर जोर दिया कि नए और अनोखे विचारों की शुरुआत उन चीजों को जोड़ने से होती है, जिन्हें पहले कभी नहीं जोड़ा गया। उन्होंने 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बायोफार्मा क्षेत्र में नए आविष्कार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।इस समारोह में एक और खास मेहमान थे पद्मश्री डॉ. अभय बंग। उन्होंने 'पीपुल्स रिसर्च' यानी 'जनता का शोध' विषय पर एक खास लेक्चर दिया। डॉ. बंग ने समझाया कि शोध का असली मकसद सिर्फ अकादमिक सफलता पाना नहीं है, बल्कि समाज की असली समस्याओं को हल करना है। उन्होंने कहा, "शोध का असली मकसद केवल अकादमिक सफलता नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक जरूरतों को पूरा करना होना चाहिए।"
इस प्लैटिनम जुबली समारोह में CSIR-CDRI ने अपने 'वर्चुअल हर्बेरियम' का भी अनावरण किया। यह एक तरह का डिजिटल संग्रह है, जिसमें पौधों की जानकारी डिजिटल रूप में रखी जाती है। इसके अलावा, संस्थान ने चार महत्वपूर्ण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए, जो भविष्य में अनुसंधान और विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।