Panchayat To Hand Over Cyber Thugs To Police Those Playing Dj Will Not Have Their Marriage Performed
साइबर ठगों को पुलिस को सौंपेगी पंचायत
नवभारत टाइम्स•
नूंह के गंगवानी गांव में पंचायत ने सामाजिक बुराइयों पर लगाम कसने के लिए कड़े फैसले लिए हैं। साइबर ठगी में पकड़े जाने वाले युवाओं को पुलिस के हवाले किया जाएगा। डीजे बजाने वाले का निकाह नहीं होगा। रात 10 बजे के बाद दुकानें बंद रहेंगी। नशे और जुआ खेलने वालों पर भी भारी जुर्माना लगेगा।
नूंह के गंगवानी गांव में सामाजिक बुराइयों पर लगाम लगाने के लिए एक पंचायत बुलाई गई। इस पंचायत में कई बड़े और सख्त फैसले लिए गए। गांव के युवाओं को साइबर ठगी से दूर रखने के लिए यह तय किया गया कि अगर कोई भी युवा इसमें पकड़ा गया तो उसे सीधे पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। साथ ही, गांव में डीजे बजाने वाले व्यक्ति का निकाह इमाम नहीं पढ़ाएंगे। अगर कोई इस नियम को तोड़ता है तो उस पर 51 हजार रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। पूर्व सरपंच मोहम्मद कासिम ने कहा कि गांव की परंपराओं और मर्यादा की रक्षा करना अब उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
पंचायत ने यह भी फैसला किया कि गांव की सभी दुकानें रात 10 बजे तक बंद हो जानी चाहिए। इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर 21 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। ग्रामीण हनीफ का मानना है कि रात में दुकानें बंद रहने से गांव में सुरक्षा और शांति बढ़ेगी। नशे की हालत में पकड़े जाने वाले व्यक्ति से 11 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा और उसे भी पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। जुआ खेलने या खिलाने वाले बाहरी व्यक्ति पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। साइबर अपराध और गो तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल पाए जाने वाले आरोपी को सीधे पुलिस को सौंप दिया जाएगा। इन सभी फैसलों को लागू करवाने के लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया गया है।पंचायत में मौजूद मास्टर मोहम्मद हुसैन ने बताया कि ये फैसले गांव के सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी हैं। उनके अनुसार, इन नियमों से अपराधों पर अंकुश लगेगा और बच्चों व युवाओं पर इसका अच्छा असर पड़ेगा। पंचायत ने शादियों में मेहर (सोना-चांदी के जेवर) की राशि साढ़े तीन तोला चांदी तय की है। इसके अलावा, बारात में मेहमानों की संख्या 30 से 50 तक सीमित रखने का नियम भी बनाया गया है। गाड़ी की सनरूफ खोलकर चलाने पर भी रोक लगाई गई है। मृत्यु होने पर सार्वजनिक भोज का आयोजन न करने जैसे नियम भी लागू किए गए हैं। इन सभी नियमों का उद्देश्य गांव के माहौल को बेहतर बनाना और सामाजिक बुराइयों को खत्म करना है।