परीक्षा कोई अंतिम कसौटी नहीं, तनाव छोड़कर करें तैयारी

Contributed byनयास्वामी निताई डेरांजा और त्यागी शिवेंद्र|नवभारत टाइम्स

परीक्षा का मौसम छात्रों के लिए उम्मीदों और दबाव का समय होता है। इस दौरान शरीर, मन और भावनाओं का ख्याल रखना महत्वपूर्ण है। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम एकाग्रता बढ़ाते हैं। योग, प्राणायाम और ध्यान तनाव कम करते हैं। घर और स्कूल का सकारात्मक माहौल छात्रों को आत्मविश्वास देता है।

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परीक्षा का मौसम आते ही घरों में माहौल बदल जाता है। चाहे बोर्ड परीक्षाएं हों या प्रवेश परीक्षाएं, लाखों छात्र उम्मीदों और दबाव के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सिर्फ ज्यादा पढ़ाई या अच्छे नोट्स बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि ऐसे तरीके अपनाना भी जरूरी है जो पढ़ाई के साथ-साथ शरीर, मन और भावनाओं का भी ख्याल रखें। परीक्षा के तनाव से निपटने की शुरुआत शरीर से होती है। अक्सर छात्र देर रात तक जागना या खाना छोड़ना ही मेहनत समझ लेते हैं, जबकि पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम ही एकाग्रता और याददाश्त की असली नींव हैं। पौष्टिक भोजन दिमाग को ऊर्जा देता है और नींद सीखी हुई बातों को भूलने से रोकती है। बड़े सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना और पढ़ाई के बीच थोड़ा आराम करना तनाव को कम करता है।

भारत की परंपरा भी हमें यही सिखाती है। योग और प्राणायाम जैसे आसान अभ्यास तनाव के समय में तुरंत राहत दे सकते हैं। जब शरीर शांत होता है, तो मन भी शांत होने लगता है। Progressive Muscle Relaxation, यानी मांसपेशियों को बारी-बारी से कसना और ढीला छोड़ना, शरीर में जमा तनाव को दूर करता है। हर दिन 10 मिनट ध्यान करने से मन स्थिर और स्पष्ट होता है। इससे छात्र घबराहट की बजाय आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई कर पाते हैं।
अगर क्लास का माहौल ऐसा हो जहाँ गलती को सीखने का हिस्सा माना जाए और रटने की बजाय समझने पर जोर दिया जाए, तो परीक्षा डर की बजाय खुशी दे सकती है। इसके उलट, हर बात पर तुलना और रैंकिंग तनाव बढ़ा सकती है। जब शिक्षक यह संदेश देते हैं कि परीक्षा महत्वपूर्ण है, पर जीवन की अंतिम कसौटी नहीं, तो छात्रों को एक स्वस्थ नजरिया मिलता है। घर का माहौल भी उतना ही असर डालता है। अगर माता-पिता सिर्फ अंकों पर नहीं, बल्कि बच्चों के प्रयास और व्यक्तित्व के विकास पर ध्यान दें, तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है। परीक्षा एक सीढ़ी है, पहचान नहीं। जब छात्र खुद को सिर्फ अंकों से नहीं, बल्कि अपनी कई तरह की प्रतिभाओं से पहचानते हैं, तब वे इस मुश्किल दौर को संतुलन, हिम्मत और गरिमा के साथ पार कर सकते हैं।

परीक्षा के इस दौर में छात्रों को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए। देर रात तक जागना या खाना छोड़ना, यह सोचना कि यही मेहनत है, बिल्कुल गलत है। असली मेहनत तो तब है जब आप पर्याप्त नींद लें, अच्छा खाना खाएं और थोड़ा व्यायाम करें। यही चीजें आपकी एकाग्रता और याददाश्त को बढ़ाती हैं। जब आप पौष्टिक भोजन करते हैं, तो आपके दिमाग को भरपूर ऊर्जा मिलती है। और जब आप अच्छी नींद लेते हैं, तो सीखी हुई चीजें आपके दिमाग में लंबे समय तक बनी रहती हैं। बड़े सिलेबस को देखकर घबराने की बजाय, उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लें। और हां, पढ़ाई के बीच थोड़ा ब्रेक लेना न भूलें। इससे आपका तनाव कम होगा और आप बेहतर तरीके से पढ़ाई कर पाएंगे।

भारतीय परंपराओं में भी तनाव कम करने के कई तरीके बताए गए हैं। योग और प्राणायाम जैसे आसान अभ्यास आपको परीक्षा के तनाव से तुरंत राहत दिला सकते हैं। जब आपका शरीर शांत होता है, तो आपका मन भी अपने आप शांत हो जाता है। Progressive Muscle Relaxation एक ऐसी तकनीक है जिसमें आप अपनी मांसपेशियों को बारी-बारी से कसते और फिर ढीला छोड़ते हैं। इससे आपके शरीर में जमा सारा तनाव दूर हो जाता है। हर दिन सिर्फ 10 मिनट ध्यान करने से आपका मन स्थिर और स्पष्ट हो जाता है। इससे आप घबराने की बजाय पूरे आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई कर पाएंगे।

स्कूल और कॉलेज का माहौल भी बहुत मायने रखता है। अगर क्लास में गलतियों को सीखने का मौका समझा जाए और रटने की बजाय चीजों को समझने पर जोर दिया जाए, तो परीक्षा का डर कम हो जाता है और पढ़ाई में मजा आने लगता है। लेकिन अगर हर समय आपकी तुलना दूसरों से की जाए या आपकी रैंकिंग की जाए, तो तनाव बढ़ जाता है। जब शिक्षक यह समझाते हैं कि परीक्षा जरूरी तो है, लेकिन यह आपके जीवन का आखिरी फैसला नहीं है, तो छात्रों को एक सही नजरिया मिलता है।

घर का माहौल भी परीक्षा के तनाव को कम या ज्यादा कर सकता है। अगर माता-पिता सिर्फ बच्चों के अंकों पर ध्यान न देकर उनके प्रयासों और उनके व्यक्तित्व के विकास पर भी ध्यान दें, तो बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है। परीक्षा सिर्फ एक सीढ़ी है, यह आपकी पहचान नहीं है। जब छात्र खुद को सिर्फ अंकों से नहीं, बल्कि अपनी विभिन्न प्रतिभाओं से पहचानते हैं, तब वे इस मुश्किल समय को धैर्य, साहस और सम्मान के साथ पार कर पाते हैं।