इंसाफ के इंतज़ार में थके युवराज के पिता अपनी बेटी संग चले गए लंदन

नवभारत टाइम्स

ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में कार्रवाई न होने से पिता निराश हैं। वह अपनी बेटी के साथ इंसाफ के इंतजार में थे। एसआईटी जांच के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पिता और बेटी ने अधिकारियों से मुलाकात कर न्याय की मांग की थी। अब वे लंदन चले गए हैं।

hope for justice dashed yuvrajs father leaves for london with daughter disappointed by lack of action
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में बेसमेंट के गड्ढे में डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की दुखद मौत के मामले में कार्रवाई का इंतजार करते-करते उनके पिता आखिरकार अपनी बेटी के साथ लंदन चले गए। एसआईटी की जांच शुरू होने पर उन्हें उम्मीद थी कि जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने से वे बेहद निराश हैं। युवराज की मौत के 16 दिन बाद उनकी बहन लंदन से भारत आई थीं और पिता के साथ यहीं रुकी रहीं ताकि वे अपने भाई के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होते देख सकें। पिता और बेटी ने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। बेटी ने भी भारत में रहकर पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी। परिवार को भरोसा दिलाया गया था कि एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई जल्द होगी।

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में न्याय की उम्मीद में उनके पिता और बहन ने काफी समय तक ग्रेटर नोएडा में इंतजार किया। लेकिन, जब उन्हें लगा कि कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है, तो उन्होंने लंदन जाने का फैसला किया। यह घटना नोएडा के सेक्टर 150 में हुई थी, जहां एक बेसमेंट के गड्ढे में डूबने से युवराज की जान चली गई थी।
शुरुआत में, जब एसआईटी (Special Investigation Team) की जांच शुरू हुई, तो परिवार को उम्मीद जगी थी कि दोषियों को सजा मिलेगी। युवराज की बहन भी खास तौर पर लंदन से भारत आई थीं ताकि वे इस मामले में हो रही प्रगति पर नजर रख सकें और अपने भाई के लिए न्याय सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने अपने पिता के साथ मिलकर कई बार अधिकारियों से मुलाकात की और न्याय की मांग की।

परिवार को यह आश्वासन दिया गया था कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन, समय बीतने के साथ और किसी भी ठोस कार्रवाई के अभाव में, परिवार बेहद निराश हो गया। इसी निराशा और इंतजार के चलते, आखिरकार उन्होंने लंदन लौटने का फैसला किया। यह घटना प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।