मेले में सामने आई युवा उद्यमियों की नई तस्वीर

नवभारत टाइम्स

सरस मेला सिर्फ खरीदारी का केंद्र नहीं, बल्कि बदलते भारत की तस्वीर भी दिखा रहा है। कम उम्र में बड़े सपने लेकर आई युवा उद्यमी आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। ममता और हिलंगनिमे जैसी बेटियां अपने हुनर से दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं।

new wave of young entrepreneurs at saras fair glimpse of self reliant india
गुड़गांव में सरस मेले में इस बार सिर्फ खरीदारी और मनोरंजन ही नहीं, बल्कि बदलते भारत की एक नई तस्वीर भी देखने को मिल रही है। सैकड़ों स्टॉलों के बीच, कम उम्र में बड़े सपने देखने वाली युवा उद्यमी आत्मनिर्भर भारत की झलक पेश कर रही हैं। ये 24-25 साल की बेटियां साबित कर रही हैं कि अगर उन्हें सही मौका और दिशा मिले तो उनकी प्रतिभा को उड़ान भरने से कोई नहीं रोक सकता।

ओडिशा के ढेंकनाल से आई 24 साल की ममता ने सिर्फ 10वीं कक्षा में पीतल (ब्रास) का काम शुरू किया था। कुछ अलग करने और नया सीखने की चाहत ने उन्हें आगे बढ़ाया। आज आठ साल बाद, ममता अपने हुनर से हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये तक कमा रही हैं। पीतल से बने पायल, सजावटी मूर्तियां और हस्तशिल्प उत्पाद देश के अलग-अलग राज्यों में भेजे जाते हैं। सबसे खास बात यह है कि ममता अपने साथ करीब 10 महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।
अरुणाचल प्रदेश से आई 25 साल की हिलंगनिमे पिछले चार साल से हैंडीक्राफ्ट के क्षेत्र में काम कर रही हैं। उन्होंने पहाड़ी राज्य की पारंपरिक कला को आज के बाजार की मांग से जोड़ा है और अपने हुनर को एक खास पहचान दिलाई है। लकड़ी पर बारीक नक्काशी, ऊनी क्राफ्ट और सिलाई के जरिए वह हर महीने हजारों रुपये कमा रही हैं। उनके स्टॉल पर सजे लकड़ी के डिजाइन और रंग-बिरंगे ऊनी उत्पाद लोगों को बहुत पसंद आ रहे हैं।

हिलंगनिमे अपने साथ अरुणाचल की खुशबू भी लेकर आई हैं। उनके स्टॉल पर पारंपरिक मोमबत्तियां और प्राकृतिक खाने-पीने की चीजें भी मिलती हैं, जो वहां की स्थानीय संस्कृति और संसाधनों को दिखाती हैं। हिलंगनिमे बताती हैं कि उनका लक्ष्य शुरू से ही आत्मनिर्भर बनना था।

यह मेला इन युवा महिलाओं के लिए एक बड़ा मंच साबित हो रहा है। वे न सिर्फ अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं, बल्कि दूसरों को भी प्रेरित कर रही हैं। यह दिखाता है कि कैसे महिलाएं अपने दम पर आगे बढ़ सकती हैं और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार कर सकती हैं। इन स्टॉलों पर पारंपरिक कला और आधुनिक सोच का संगम देखने को मिल रहा है। ये युवा उद्यमी देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

सरस मेले में इन युवा महिलाओं की सफलता की कहानियां हमें यह सिखाती हैं कि अगर सही अवसर मिले तो कोई भी अपने सपनों को पूरा कर सकता है। वे सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि अपने आसपास की महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं। यह आत्मनिर्भर भारत की एक सच्ची मिसाल है, जहां महिलाएं सशक्त होकर आगे बढ़ रही हैं और देश की तरक्की में भागीदार बन रही हैं।