Cbse Students Appeared For Haryana Board Math Exam Breathed A Sigh Of Relief
हरियाणा बोर्ड का ‘गणित’ समझकर CBSE के स्टूडेंट्स ने दी परीक्षा
नवभारत टाइम्स•
सीबीएसई के दसवीं के छात्रों को एडमिट कार्ड न मिलने से बड़ी राहत मिली। हाई कोर्ट के आदेश पर उन्होंने हरियाणा बोर्ड के तहत गणित की परीक्षा दी। दोनों बोर्ड के पैटर्न में अंतर के बावजूद छात्रों ने सीमित समय में तैयारी कर परीक्षा दी। हिंदी पेपर को लेकर चिंता बनी हुई है।
गुड़गांव में सीबीएसई की लापरवाही से एडमिट कार्ड न मिलने से परेशान 10वीं के छात्रों को गुरुवार को बड़ी राहत मिली। हाई कोर्ट के आदेश के बाद ये छात्र हरियाणा बोर्ड के तहत परीक्षा दे पाए। गणित के पेपर से हरियाणा बोर्ड की 10वीं की परीक्षा शुरू हुई। जिन 11 छात्रों की परीक्षा छूट गई थी, उनमें से 10 ने हरियाणा बोर्ड से परीक्षा दी। एक छात्र के माता-पिता ने अगले साल परीक्षा देने का फैसला किया है। परीक्षा देकर निकले छात्रों ने बताया कि दोनों बोर्ड के पैटर्न अलग होने से थोड़ी मुश्किल हुई, लेकिन कम समय में तैयारी के बावजूद पेपर अच्छा गया। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और समय रहते हरियाणा बोर्ड के पैटर्न को समझकर तैयारी की, जिससे उनका एक साल बर्बाद होने का डर खत्म हो गया।
शनिवार को होने वाले हिंदी के पेपर को लेकर छात्रों में चिंता है। उनका कहना है कि हरियाणा बोर्ड और सीबीएसई के हिंदी सिलेबस में अंतर है, और तैयारी के लिए सिर्फ एक दिन का समय मिला है। कई छात्रों ने यह भी बताया कि उन्होंने पहले फिजिकल एजुकेशन विषय नहीं पढ़ा था। आईटी विषय होने के कारण अचानक विषय बदलने से उनकी परेशानी बढ़ गई है।इस मुश्किल घड़ी में एक्सपर्ट्स ने छात्रों को घबराने की सलाह दी है। उनका कहना है कि समझदारी से काम लेकर वे सफलता पा सकते हैं। रिटायर्ड प्रिंसिपल सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि फॉर्म भरते समय छात्रों को विषय चुनने का साफ विकल्प दिया जाता है। उसी समय विषयों का चयन होता है। उन्होंने कहा, "हरियाणा बोर्ड में भी आईटी (IT) और रिटेल जैसे विषयों की पढ़ाई होती है। इसके साथ ही हिंदी का पाठ्यक्रम भी एनसीईआरटी के तहत ही कराया जाता है। स्टूडेंट्स घबराने की जरूरत नहीं है।" उन्होंने आगे सलाह दी, "छात्र पिछले 4–5 वर्ष के प्रश्नपत्रों के आधार पर तैयारी करें और टाइम मैनेजमेंट पर फोकस करें।"
यह घटना गुड़गांव के एक स्कूल की लापरवाही के कारण हुई, जिसने सीबीएसई 10वीं के छात्रों के एडमिट कार्ड जारी नहीं किए। इस वजह से कई छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गए थे। हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद छात्रों को हरियाणा बोर्ड के तहत परीक्षा देने का मौका मिला। यह एक बड़ी राहत थी, क्योंकि इससे उनका एक साल बर्बाद होने से बच गया।
छात्रों ने स्वीकार किया कि दोनों बोर्ड के परीक्षा पैटर्न में अंतर था। गणित के पेपर में उन्हें थोड़ी कठिनाई हुई, लेकिन उन्होंने सीमित समय में तैयारी करके अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और हरियाणा बोर्ड के पैटर्न को समझने की कोशिश की। यह उनके लिए एक बड़ी सीख थी कि मुश्किल हालात में भी धैर्य और सही रणनीति से सफलता पाई जा सकती है।
हालांकि, हिंदी के पेपर को लेकर छात्रों की चिंता बनी हुई है। सीबीएसई और हरियाणा बोर्ड के हिंदी सिलेबस में अंतर होने के कारण उन्हें तैयारी के लिए कम समय मिल रहा है। कुछ छात्रों ने फिजिकल एजुकेशन की जगह आईटी विषय चुना था, और अब अचानक विषय बदलने से उन्हें परेशानी हो रही है। यह एक ऐसी स्थिति है जहां छात्रों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में घबराने की बजाय शांत रहकर समाधान खोजना चाहिए। रिटायर्ड प्रिंसिपल सुरेंद्र वर्मा ने स्पष्ट किया कि विषय चयन फॉर्म भरते समय ही हो जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि हरियाणा बोर्ड में भी आईटी जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं और हिंदी का सिलेबस एनसीईआरटी पर आधारित है। उन्होंने छात्रों को पिछले सालों के प्रश्नपत्रों को हल करने और समय प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। यह सलाह छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद करेगी और उनका आत्मविश्वास बढ़ाएगी।