शीतला माता मंदिर के पानी में नहीं मिला क्लोरीन

नवभारत टाइम्स

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शीतला माता मंदिर परिसर में पानी की जांच की। चार सैंपल लिए गए। दो सैंपल का ओर्थोटोलिडाइन टेस्ट किया गया। रिपोर्ट निगेटिव आई और पानी में क्लोरीन नहीं मिला। टीम ने मंदिर स्टाफ को क्लोरिनेशन के लिए गोलियां दीं और टंकियों की सफाई के निर्देश दिए।

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चैत्र नवरात्र से ठीक पहले, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शीतला माता मंदिर परिसर में पानी की गुणवत्ता की जांच की। इस दौरान पानी की सप्लाई के चार सैंपल लिए गए, जिनमें से दो मुख्य सप्लाई से और दो अन्य सप्लाई से थे। इन सभी सैंपलों को बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया है। मौके पर ही दो सैंपल का ओर्थोटोलिडाइन (OT) टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई और पानी में क्लोरीन की मात्रा बिल्कुल नहीं मिली। वरिष्ठ स्वास्थ्य निरीक्षक राममेहर की अगुवाई में हुई इस कार्रवाई के बाद, मंदिर स्टाफ को तुरंत पानी की टंकियों में क्लोरिनेशन के लिए गोलियां दी गईं और टंकियों की नियमित सफाई के निर्देश भी दिए गए। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. विकास स्वामी ने बताया कि मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, इसलिए पानी से किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नवरात्र शुरू होने से पहले ही मंदिर परिसर में पानी की जांच का काम पूरा कर लिया। यह सुनिश्चित करने के लिए कि श्रद्धालुओं को साफ और सुरक्षित पानी मिले, चार सैंपल लिए गए। इन सैंपलों को सेक्टर-10 स्थित सिविल अस्पताल भेजा गया है ताकि उनकी पूरी जांच हो सके।
जांच के दौरान, पानी की सप्लाई के दो सैंपल का ओर्थोटोलिडाइन (OT) टेस्ट मौके पर ही किया गया। इस टेस्ट से पता चलता है कि पानी में कीटाणुनाशक क्लोरीन है या नहीं। रिपोर्ट निगेटिव आने का मतलब है कि पानी में क्लोरीन की मात्रा नहीं थी। क्लोरीन पानी को साफ रखने और कीटाणुओं को मारने में मदद करता है।

जब टीम को पानी में क्लोरीन नहीं मिला, तो उन्होंने तुरंत मंदिर के कर्मचारियों को निर्देश दिए। उन्हें पानी की टंकियों में क्लोरिनेशन के लिए गोलियां दी गईं। ये गोलियां पानी में क्लोरीन की सही मात्रा बनाए रखने में मदद करती हैं। साथ ही, टीम ने टंकियों की नियमित सफाई करने की भी सलाह दी।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. विकास स्वामी ने इस कार्रवाई के पीछे की वजह बताई। उन्होंने कहा कि नवरात्र के मेले में बहुत सारे भक्त मंदिर आते हैं। ऐसे में, अगर पानी की गुणवत्ता खराब हुई तो लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने यह एहतियाती कदम उठाया है ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित रहें।