महीनों तक होटल में रहा, रेंट के नाम पर दिखाए पेमेंट के फर्ज़ी स्क्रीनशॉट

नवभारत टाइम्स

गुड़गांव में एक सर्विस अपार्टमेंट से 6.17 लाख रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक युवक ने फर्जी यूपीआई ऐप से पेमेंट के जाली स्क्रीनशॉट दिखाकर होटल में महीनों तक मुफ्त में रहा। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उसने यूट्यूब पर देखकर यह तरीका सीखा था।

stayed in hotel for months duped rs 6 lakh by showing fake payment screenshots
गुड़गांव में एक सर्विस अपार्टमेंट से 6.17 लाख रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक शातिर युवक ने फर्जी UPI ऐप का इस्तेमाल कर होटल प्रबंधन को पेमेंट के जाली स्क्रीनशॉट दिखाए और बिना पैसे चुकाए लंबे समय तक वहां ठहरता रहा। पुलिस ने DLF फेज 5 से आरोपी हिमांशु को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने MCA किया है और यूट्यूब चैनल प्रमोट करने का काम करता है।

लाइम ट्री होटल्स सर्विस अपार्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर तपेश कुमार ने पुलिस को बताया कि सेाहना निवासी हिमांशु 4 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2025 और फिर 15 अक्टूबर से 24 फरवरी 2026 तक उनके डीएलएफ फेज फाइव गुड़गांव स्थित सर्विस अपार्टमेंट में रुका था। आरोप है कि हिमांशु ने एक फर्जी UPI ऐप से पेमेंट का स्क्रीनशॉट बनाकर वॉट्सऐप पर भेजा। होटल प्रबंधन को तब शक हुआ जब उनके बैंक खाते में पैसे जमा नहीं हुए। बैंक स्टेटमेंट की जांच करने पर पता चला कि आरोपी द्वारा दिखाए गए सभी ट्रांजेक्शन फर्जी थे। जब हिमांशु से बैंक ट्रांजैक्शन आईडी और डेबिट मैसेज मांगा गया, तो वह कोई सबूत पेश नहीं कर सका। आरोपी ने अलग-अलग तारीखों में कुल 6 लाख 17 हजार रुपये के फर्जी भुगतान दिखाए थे।
थाना सेक्टर-53 पुलिस टीम ने आरोपी हिमांशु को डीएलएफ फेज-5 से पकड़ा। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने यूट्यूब पर पेमेंट ऐप की फेक एप्लिकेशन का वीडियो देखा था। उस वीडियो में बताया गया था कि कैसे ऐप से फर्जी पेमेंट दिखाया जा सकता है। यह देखकर आरोपी ने भी ऐसी ही एक फेक ऐप इंस्टॉल कर ली। इस ऐप में केवल स्कैनर काम करता था, बाकी फीचर्स इनएक्टिव थे। इस ऐप की मदद से आरोपी ने 16 फर्जी ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट होटल मैनेजर को भेजे और धोखाधड़ी को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है। उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जुडीशल कस्टडी में भेज दिया गया है।

यह मामला ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को दिखाता है, जहां लोग नई तकनीकों का गलत इस्तेमाल कर दूसरों को ठग रहे हैं। फर्जी UPI ऐप का इस्तेमाल करके पेमेंट के जाली स्क्रीनशॉट दिखाना एक नया तरीका है, जिससे लोगों को आसानी से धोखा दिया जा सकता है। इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहने और किसी भी पेमेंट की पुष्टि बैंक खाते में पैसे आने के बाद ही करने की सलाह दी जाती है। यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐसी जानकारी का उपलब्ध होना भी चिंता का विषय है, जिस पर लगाम लगाने की जरूरत है। पुलिस इस मामले की आगे जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी ने और भी कहीं इस तरह की धोखाधड़ी की है या नहीं।