खेड़ी कलां में अस्पताल बनाने की योजना को लगा झटका

नवभारत टाइम्स

खेड़ी कलां में 200 बेड का अस्पताल बनाने की योजना को झटका लगा है। इंडियन पब्लिक हेल्थ सर्विसेज की रिपोर्ट में आईपीडी और ओपीडी की संख्या कम पाई गई है। डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज ने दोबारा रिपोर्ट मांगी है। स्वास्थ्य विभाग इसकी तैयारियों में जुटा है। ग्रेटर फरीदाबाद और आसपास के गांवों के लिए यह अस्पताल महत्वपूर्ण था।

200 bed hospital plan in kheri kalan hit by feasibility report shortfall
फरीदाबाद: खेड़ी कलां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को 200 बेड के आधुनिक अस्पताल में बदलने की योजना को फिलहाल झटका लगा है। इंडियन पब्लिक हेल्थ सर्विसेज (आईपीएचएस) की रिपोर्ट में अस्पताल के आईपीडी (इनपेशेंट डिपार्टमेंट) और ओपीडी (आउटपेशेंट डिपार्टमेंट) का इस्तेमाल 40 प्रतिशत के करीब पाया गया है, जबकि नियमों के अनुसार यह कम से कम 70 प्रतिशत होना चाहिए। इस वजह से डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज ने दोबारा से फिजिबिलिटी रिपोर्ट मांगी है और स्वास्थ्य विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। यह अस्पताल ग्रेटर फरीदाबाद और आसपास के 33 गांवों के करीब 10 लाख लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए बनाया जाना था, ताकि लोगों की बीके अस्पताल पर निर्भरता कम हो सके। मंत्री राजेश नागर के कहने पर स्वास्थ्य विभाग ने 3 साल का आईपीडी और ओपीडी का ब्योरा भेजा था, जिसके बाद आईपीएचएस की टीम ने जायजा लिया था।

इस 200 बेड वाले अस्पताल की मांग इसलिए की गई थी ताकि ग्रेटर फरीदाबाद और आसपास के 33 गांवों के लगभग 10 लाख लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। लोगों का कहना था कि इस इलाके की बड़ी आबादी को देखते हुए यह इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। इससे लोगों को इलाज के लिए बीके अस्पताल पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इस मांग को गंभीरता से लेते हुए मंत्री राजेश नागर ने स्वास्थ्य विभाग को इस पर कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज ने स्वास्थ्य विभाग से इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव मांगा था।
स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तरफ से 3 साल का आईपीडी और ओपीडी का ब्योरा भेजा था। आईपीडी का मतलब होता है वो मरीज जो अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करवाते हैं, और ओपीडी का मतलब होता है वो मरीज जो डॉक्टर को दिखाकर घर चले जाते हैं। विभाग ने यह जानकारी इसलिए भेजी थी ताकि यह पता चल सके कि अस्पताल का कितना इस्तेमाल हो रहा है। इस जानकारी के आधार पर ही आईपीएचएस की टीम ने मौके पर जाकर जायजा लिया था।

आईपीएचएस की टीम ने जब अस्पताल का जायजा लिया तो उन्होंने पाया कि आईपीडी और ओपीडी का इस्तेमाल सिर्फ 40 प्रतिशत के करीब हो रहा है। यह आंकड़ा नियमों के तहत काफी कम है। नियमों के अनुसार, किसी भी अस्पताल के अपग्रेडेशन या नए निर्माण के लिए आईपीडी और ओपीडी का इस्तेमाल कम से कम 70 प्रतिशत होना चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि अस्पताल की जरूरत है और उसका सही इस्तेमाल होगा।

इस रिपोर्ट के आने के बाद डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज ने स्वास्थ्य विभाग से दोबारा से फिजिबिलिटी रिपोर्ट की मांग की है। फिजिबिलिटी रिपोर्ट का मतलब है कि यह पता लगाना कि कोई योजना कितनी व्यावहारिक और संभव है। अब स्वास्थ्य विभाग इस नई रिपोर्ट को तैयार करने की तैयारियों में जुटा हुआ है। यह रिपोर्ट यह बताएगी कि क्या इस अस्पताल को 200 बेड का बनाया जाना वाकई में सही होगा या नहीं।