विज्ञापन 2010 में निरस्त, फिर भी हुई नियुक्ति

नवभारत टाइम्स

केजीएमयू के लिंब सेंटर में सीनियर प्रोस्थेटिस्ट की भर्ती पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि 2010 में रद्द किए गए विज्ञापन के आधार पर नियुक्ति हुई। यह पद 2008 में विज्ञापित हुआ था और बाद में 2010 में विज्ञापन निरस्त कर दिया गया था।

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लखनऊ केजीएमयू के लिंब सेंटर में सीनियर प्रोस्थेटिस्ट के पद पर हुई भर्ती सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि 2010 में रद्द किए गए विज्ञापन के आधार पर ही नियुक्ति कर दी गई, जबकि उसी साल जारी नए विज्ञापन में इस पद का कोई जिक्र नहीं था। आरटीआई कार्यकर्ता सत्यवान मिश्रा ने इस मामले को उठाया है और पूछा है कि जब विज्ञापन ही रद्द हो गया था, तो भर्ती किस नियम के तहत हुई? मिश्रा का यह भी कहना है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और उन्हें जरूरी दस्तावेज नहीं दिए गए।

रायबरेली रोड निवासी सत्यवान मिश्रा ने नौ जून 2025 को आरटीआई के जरिए यह जानकारी हासिल की। उनके अनुसार, सीनियर प्रोस्थेटिस्ट का पद पहले 2008 में विज्ञापित हुआ था। बाद में 2010 में इस विज्ञापन को रद्द कर दिया गया। इसके बावजूद, उसी पद पर एक नई नियुक्ति कर दी गई। मिश्रा का सीधा सवाल है कि "जब विज्ञापन रद्द हो चुका था तो फिर भर्ती किस नियम के तहत की गई?"
सत्यवान मिश्रा ने इस भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरटीआई के तहत चयन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज मांगे थे। लेकिन, उन्हें सभी आवश्यक कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए। यह स्थिति इस भर्ती को और भी संदिग्ध बनाती है।

प्रोस्थेटिस्ट (Prosthetist) वह विशेषज्ञ होता है जो कृत्रिम अंग (artificial limbs) बनाने और फिट करने का काम करता है। लिंब सेंटर (Limb Centre) ऐसी जगह होती है जहाँ ऐसे मरीजों का इलाज किया जाता है जिन्हें कृत्रिम अंगों की जरूरत होती है। केजीएमयू (KGMU) उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेजों में से एक है।