NBT रिपोर्ट: अब पर्सनल लोन सिर्फ मजबूरी का नाम नहीं रह गया है। बैंकिंग सेक्टर में एक नया चलन देखने को मिल रहा है। अमीर और अच्छी बचत वाले लोग भी अपनी एफडी (FD) या निवेश तोड़ने के बजाय पर्सनल लोन लेना पसंद कर रहे हैं। बैंक भी अब जोखिम कम करने के लिए केवल भरोसेमंद और पुराने ग्राहकों को ही तवज्जो दे रहे हैं। 'सुविधा' और 'तुरंत पैसा' मिलने की वजह से लोग अब शादियों और घूमने-फिरने के लिए भी कर्ज ले रहे हैं।
क्या है बदलाव? : कोटक महिंद्रा बैंक के अमित पाठक का कहना है कि लोन लेने वाले ग्राहकों का प्रोफाइल थोड़ा बदल रहा है। अब यह सिर्फ जरूरत वाले वर्ग तक सीमित नहीं है। मध्यम-अमीर और अमीर वर्ग के लोग भी इसकी तरफ बढ़ रहे हैं।
क्या मसला है? : ET के मुताबिक, यह बदलाव डिजिटल ऐप के जरिए खूब बांटे गए छोटे-छोटे पर्सनल लोन को लेकर RBI की सख्ती के बाद आया है। Equifax क्रेडिट इनफॉर्मेशन सर्विसेज के एमडी आदित्य चटर्जी कहते हैं कि बैंकों ने पर्सनल लोन देने के नियमों को काफी सख्त कर दिया है। वे अब किसी ऐसे व्यक्ति को पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं देंगे जिसका पहले का कोई क्रेडिट रेकॉर्ड न हो या बैंक के साथ कोई पुराना रिश्ता न हो। लेकिन बैंकर्स देख रहे हैं कि इन लोन का तुरंत मिल जाना उन लोगों को भी अपनी ओर खींच रहा है जिनके पास पर्याप्त बचत है।
क्या है वजह? : अमित पाठक कहते हैं कि अपनी जमा-पूंजी या निवेश में हाथ डालने के बजाय लोगों ने अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लेना शुरू कर दिया है। यह एक बहुत मजबूत ट्रेंड बनकर उभर रहा है। उनके मुताबिक, पर्सनल लोन को अब कोई सामाजिक बुराई (taboo) नहीं माना जाता। बचत करने वाले लोग म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जैसे अपने लॉन्ग-टर्म निवेश को सुरक्षित रखना बेहतर समझते हैं।
क्यों ले रहे लोन? : अमित पाठक का कहना है कि लोग घर की मरम्मत या पढ़ाई-लिखाई जैसे कामों के लिए कर्ज ले रहे हैं। वे विदेश यात्रा और शादियों के लिए भी कर्ज ले रहे हैं।

