यमुना सिटी में बनेंगी सीटी स्कैनर और MRI मशीनें

नवभारत टाइम्स

यमुना सिटी में एक बड़ा मेडिकल हब तैयार हो रहा है। शुक्रा फ़ार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड कंपनी यहां सीटी स्कैनर, एमआरआई मशीनें बनाएगी। यह कंपनी जीवनरक्षक चिकित्सा तकनीकें विकसित करेगी। इससे कैंसर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। इस प्रोजेक्ट से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

ct scanners and mri machines to be manufactured in yamuna city creating over 900 jobs
ग्रेटर नोएडा के यमुना सिटी में बन रहे मेडिकल डिवाइस पार्क में शुक्रा फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड को 10 एकड़ जमीन का आवंटन पत्र मिल गया है। यह कंपनी विश्वस्तरीय जीवनरक्षक चिकित्सा तकनीकें बनाएगी, जिसमें जटिल कैंसर के इलाज के लिए बीएनसीटी (Boron Neutron Capture Therapy) तकनीक भी शामिल है। यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह और एसीईओ शैलेंद्र भाटिया ने मंगलवार को यह आवंटन पत्र जारी किया। इस नई इकाई से 900 से ज्यादा लोगों को सीधी नौकरी मिलेगी और 2000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। कंपनी यहां 587 करोड़ रुपये का निवेश करेगी और सीटी स्कैनर, एमआरआई, पीईटी स्कैन, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनों जैसे रेडियोलॉजी और इमेजिंग उपकरण बनाएगी। साथ ही, एनेस्थीसिया सिस्टम और आईसीयू व ऑपरेशन थिएटर के लिए जरूरी रेस्पिरेटरी केयर समाधान भी तैयार किए जाएंगे।

यह मेडिकल डिवाइस पार्क यमुना सिटी में तेजी से विकसित हो रहा है। शुक्रा फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड को यहां 10 एकड़ का प्लॉट मिला है। यह कंपनी सिर्फ साधारण उपकरण ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे उन्नत और जीवन बचाने वाली चिकित्सा तकनीकें भी बनाएगी।
खास बात यह है कि यह आधुनिक सुविधा बीएनसीटी (Boron Neutron Capture Therapy) का उत्पादन करेगी। यह एक खास तकनीक है जो जटिल कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए बहुत मददगार साबित होगी। इससे ऐसे मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

यीडा (Yamuna Expressway Industrial Development Authority) के सीईओ राकेश कुमार सिंह और एसीईओ शैलेंद्र भाटिया ने मंगलवार को इस कंपनी को आवंटन पत्र सौंपा। इस नई फैक्ट्री के लगने से इलाके में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। करीब 900 लोगों को सीधे नौकरी मिलेगी और 2000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलेगा।

शुक्रा फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड इस प्रोजेक्ट में 587 करोड़ रुपये का भारी निवेश करेगी। इस पैसे से यहां कई तरह के रेडियोलॉजी और इमेजिंग उपकरण बनाए जाएंगे। सोचिए, सीटी स्कैनर, एमआरआई, पीईटी स्कैन, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी मशीनें यहीं बनेंगी।

इतना ही नहीं, कंपनी एनेस्थीसिया सिस्टम भी बनाएगी। यह ऑपरेशन के दौरान मरीजों को बेहोश करने के लिए इस्तेमाल होता है। साथ ही, आईसीयू (Intensive Care Unit) और ऑपरेशन थिएटर के लिए जरूरी रेस्पिरेटरी केयर समाधान भी विकसित किए जाएंगे। ये ऐसे उपकरण हैं जो मरीजों को सांस लेने में मदद करते हैं, खासकर गंभीर बीमारियों में।