बिना पानी कनेक्शन विभाग भेज रहा लाखों का बिल

नवभारत टाइम्स

ग्रेनो वेस्ट की चार सोसायटियों में हजारों परिवार पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। इन सोसायटियों में पानी का कनेक्शन नहीं है, फिर भी विभाग लाखों रुपये के बिल भेज रहा है। बोरवेल और टैंकरों से पानी की आपूर्ति हो रही है। बिल्डर प्रबंधन और ग्रेनो प्राधिकरण की लापरवाही के कारण लोगों को परेशानी हो रही है।

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ग्रेनो वेस्ट की चार सोसायटियों में तीन हजार से ज्यादा परिवार पिछले कई सालों से पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। वाइट आर्किड, ऐश्वर्यम, कासा वुडस और प्रिस्टीन एवेन्यू जैसी सोसायटियों में रहने वाले लोगों को सरकारी सिस्टम की लापरवाही के चलते आज तक पानी का कनेक्शन नहीं मिल पाया है। घरों में बोरवेल से पानी की सप्लाई हो रही है, लेकिन भूजल स्तर नीचे जाने के कारण अब निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। बिल्डर प्रबंधन और ग्रेनो प्राधिकरण की अनदेखी के चलते इन सोसायटियों में पानी का कनेक्शन नहीं है, फिर भी उनसे पानी के बिल वसूले जा रहे हैं।

गौड़ सिटी-2 एरिया की इन चार सोसायटियों में रहने वाले हजारों परिवार पानी की किल्लत से परेशान हैं। वाइट आर्किड, ऐश्वर्यम, कासा वुडस और प्रिस्टीन एवेन्यू, ये वो सोसायटियां हैं जिन्हें बसे हुए कई साल बीत चुके हैं। लेकिन सरकारी सिस्टम की घोर लापरवाही के चलते आज तक इन सोसायटियों में पानी का कनेक्शन नहीं लग पाया है। लोग अपने घरों में बोरवेल के सहारे जी रहे हैं। लेकिन अब बोरवेल का पानी भी कम होने लगा है। भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिसकी वजह से लोगों को निजी टैंकरों से महंगा पानी खरीदना पड़ रहा है।
आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ, एसीईओ और संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे गए हैं, लेकिन कोई भी मदद नहीं मिली है। जिला भूगर्भ विभाग और जिला प्रशासन भी इस मामले में अनजान बने हुए हैं। गौड़ सिटी-2 टाउनशिप में कई हाउसिंग सोसायटी हैं। आरोप है कि हाउसिंग एरिया को बसाने के बाद भी बिल्डर प्रबंधन और ग्रेनो प्राधिकरण की लापरवाही के चलते पानी का कनेक्शन ही नहीं दिया गया है। इसके बावजूद, इन सोसायटियों से पानी के बिल भेजे जा रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट्स (AOA) कई सालों से पानी के नए कनेक्शन के लिए लगातार मांग कर रही है, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिल रहा है।

इस मुद्दे पर हजारों परिवार ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ, एसीईओ और जल विभाग के अधिकारियों से मिलकर अपनी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन पानी का कनेक्शन आज तक नहीं मिल पाया है। प्रिस्टीन एवेन्यू सोसायटी के निवासी अभिषेक कुमार ने बताया कि उनके परिसर में 438 फ्लैट हैं, जिनमें करीब दो हजार लोग रहते हैं। उन्होंने बताया कि सोसायटी के बाहर तक कुछ समय पहले पानी की सप्लाई के लिए पाइपलाइन डाली गई थी, लेकिन उसका कनेक्शन नहीं जोड़ा गया। अभिषेक कुमार ने आरोप लगाया कि कई बार मेंटिनेस टीम की तरफ से मीटिंग में पानी के लिए जारी किए गए बिल को भरने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में, जब पानी की सप्लाई ही नहीं आ रही है, तो बिल क्यों दिया जाए?

ग्रेनो प्राधिकरण ने 2024 में प्रिस्टीन एवेन्यू सोसायटी का, बिना पानी कनेक्शन के ही, 49 लाख 72 हजार 433 रुपये का बिल जारी कर दिया था। इस सोसायटी के लिए जल विभाग साल 2017 से बिल बना रहा है, जबकि आज तक वहां पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

ग्रेनो वेस्ट की ऐश्वर्यम सोसायटी के निवासी दीपक गुप्ता ने बताया कि उनके परिसर में 1200 से अधिक परिवार रह रहे हैं, लेकिन ग्रेनो प्राधिकरण ने उन्हें पानी का कनेक्शन नहीं दिया है। यहां भी पानी के बिल आ रहे हैं। फिलहाल, फ्लैटों में पानी की सप्लाई ग्राउंड वॉटर (भूजल) के जरिये की जा रही है। यह भूजल भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, जिससे भविष्य में और भी बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।

वाइट आर्किड सोसायटी के एओए सचिव ऐश्वर्या प्रकाश पांडेय ने बताया कि उनकी सोसायटी में चार टावरों में 466 परिवार रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रेनो प्राधिकरण ने तीन टावरों में ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) जारी कर दिया और बिल्डर ने लोगों को पजेशन (घर का कब्जा) भी दे दिया, पर पानी का कनेक्शन नहीं मिला। उन्होंने आगे बताया कि सोसायटी में ग्रेनो प्राधिकरण बिना पानी कनेक्शन के ही बिल भेज रहा है, जो करीब 40 से 45 लाख रुपये बकाया है। पानी कनेक्शन के लिए वे कई सालों से लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई भी जवाब देने वाला नहीं है। इस वजह से उन्हें बाहर से टैंकर के जरिये पानी मंगवाकर पीने को मजबूर होना पड़ रहा है।

कासा वुड स्टॉक सोसायटी के निवासियों ने भी अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि उनके परिसर के निवासी बिना पानी कनेक्शन के ही रह रहे हैं। उन्हें गर्मी और सर्दी, दोनों ही मौसम में पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। पानी की खपत बढ़ते हुए देखकर उन्हें बाहर से टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। यह स्थिति आम आदमी के जीवन को मुश्किल बना रही है। इन सोसायटियों के हजारों परिवार सरकारी अनदेखी और लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं।