रणनीतिक साझेदारी

नवभारत टाइम्स

भारत और यूरोप के बीच संबंध अब रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। उर्सुला वॉन डेर लेयेन का बयान भारत पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। सप्लाई चेन, ऊर्जा, सुरक्षा और टेक्नॉलजी जैसे क्षेत्रों में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो रही है। संरक्षणवाद के इस दौर में दोनों का सहयोग वैश्विक स्थिरता और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूती देगा।

india europe strategic partnership a step towards global stability
27 जनवरी के संपादकीय 'दुनिया की नजर' में भारत की बदलती वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत पर बढ़ते भरोसे को स्वीकार किया है, जो केवल प्रशंसा से कहीं बढ़कर है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्ते अब सिर्फ औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। सप्लाई चेन, ऊर्जा, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की भूमिका अब निर्णायक होती जा रही है। संरक्षणवाद के इस दौर में, भारत और यूरोप का साथ मिलकर काम करना वैश्विक स्थिरता और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने में अहम साबित होगा।

प्रेरणा रावत ने ईमेल के माध्यम से यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि भारत की वैश्विक मंच पर बढ़ती अहमियत को उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बयान से समझा जा सकता है। यह बयान भारत के प्रति यूरोपीय संघ के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध अब केवल बातचीत तक सीमित नहीं हैं। ये संबंध अब एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रहे हैं। इसका मतलब है कि दोनों पक्ष मिलकर महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करेंगे।

खासकर सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। दुनिया में जब हर कोई अपने देश को पहले रखने की बात कर रहा है (जिसे संरक्षणवाद कहते हैं), तब भारत और यूरोप का साथ आना बहुत मायने रखता है। यह साझेदारी दुनिया को स्थिर बनाने और अंतरराष्ट्रीय नियमों को मजबूत करने में मदद करेगी।