Give Up Greed Find Happiness And Peace In Life Self victory Is True Development
लालच छोड़ने पर जीवन में मिलेगी सुख और शांति
नवभारतटाइम्स.कॉम•
हम ऐसे समय में जी रहे हैं, जहां विज्ञान और तकनीक ने दुनिया को पहले से कहीं अधिक जोड़ दिया है, लेकिन मनुष्यों के बीच भावनात्मक दूरियां बढ़ती जा रही हैं। सूचनाओं की बाढ़ है, सुविधाओं की कोई कमी नहीं, फिर भी मन की शांति और आत्मसंतोष दुर्लभ होते जा रहे हैं। अभी सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं कि दुनिया कितनी तेजी से बदल रही है, बल्कि यह है कि मनुष्य कितना विकसित हो रहा है।
आज समाज को केवल नई तकनीकों या आविष्कारों की नहीं, एक नए मनुष्य की आवश्यकता है। ऐसा मनुष्य, जो बुद्धिमान होने के साथ-साथ विवेकवान भी हो, जो सफलता के साथ संवेदनशीलता और प्रगति के साथ नैतिकता को भी महत्व दे। जो अपनी गलतियों को स्वीकार कर उसमें सुधार करे। वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हमने आवश्यकता और लालसा के बीच की सीमा को धुंधला कर दिया है। जब जीवन का उद्देश्य केवल अधिक पाना बन जाता है, तब संतोष और शांति पीछे छूट जाते हैं। यही कारण है कि भौतिक समृद्धि बढ़ने के बावजूद तनाव, प्रतिस्पर्धा और असंतोष भी बढ़ रहे हैं। वास्तविक विकास चेतना का विस्तार भी है। भारतीय चिंतन सदैव आत्मविजय को बाहरी विजय से अधिक महत्व देता रहा है। ध्यान, आत्म-अनुशासन, नैतिकता और साधना केवल आध्यात्मिक अवधारणाएं नहीं, संतुलित और स्वस्थ जीवन के आधार हैं। जो व्यक्ति वर्तमान में जीना सीख लेता है, वही भविष्य का निर्माण कर सकता है। मनुष्य के भीतर इच्छा शक्ति, श्रद्धा और चरित्र जैसी अपार शक्तियां निहित हैं। इतिहास बताता है कि बड़े परिवर्तन दृढ़ संकल्पों से आए हैं। आज जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ओर तेजी से बढ़ रही है, तब मानवीय संवेदना, करुणा और नैतिकता का महत्व और बढ़ गया है।आने वाले समय का श्रेष्ठ मनुष्य वह नहीं होगा जिसके पास सबसे अधिक साधन होंगे, वह होगा जिसके भीतर सबसे अधिक संतुलन, आत्मजागरण और मानवता होगी। यही नया मनुष्य नए भारत और बेहतर विश्व की सबसे बड़ी आवश्यकता है।