संकल्प की जीत

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jagdish chandra basus resolve the fight for equal pay won through wifes sacrifice
बात उन दिनों की है, जब महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु कलकत्ता के एक महाविद्यालय में विज्ञान के प्राध्यापक थे। उनके साथ अंग्रेज प्राध्यापक भी थे। योग्यता, पद और कार्य समान होने के बावजूद अंग्रेजों को उनसे अधिक वेतन मिलता। कारण केवल इतना था कि वह अंग्रेज थे और बसु भारतीय। इस भेदभाव से दुखी होकर बसु ने विरोध का अनोखा मार्ग चुना। उन्होंने घोषणा कर दी कि जब तक उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन नहीं मिलेगा, वह अपना वेतन स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार के पत्रों और आग्रहों के बावजूद उन्होंने लंबे समय तक वेतन नहीं लिया। इस निर्णय से परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई। तब उनकी पत्नी अबला बसु उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी रहीं। उन्होंने अपने आभूषण बेचने का प्रस्ताव रखा और खर्च कम करने के लिए चंदननगर में रहने का निर्णय लिया। प्रतिदिन हुगली नदी पार कर कॉलेज जाना कठिन था, इसलिए उनकी पत्नी स्वयं नाव चलाकर उन्हें कॉलेज छोड़ने और वापस लाने लगीं। पत्नी के त्याग और अपने अटल संकल्प के बल पर बसु संघर्ष करते रहे। अंत में अंग्रेज सरकार को झुकना पड़ा और उन्हें अंग्रेज प्राध्यापकों के समान वेतन मिला। इस घटना की यही सीख है कि संकल्प दृढ़ हो तो विजय अवश्य मिलती है।