आसनों का आसन!

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netajis shavasana style on international yoga day a dash of humor and satire
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दिन मेरी नजर सिर्फ अपने वाले नेता जी पर थी। जितनी भारी उनकी काया, उतनी ही भारी-भरकम उनकी देशभक्ति। साल के तीन सौ चौसठ दिन तो वह बड़ी कुशलता से अपनी इस भारी काया और भारी-भरकम देशभक्ति के बीच संतुलन साध लेते हैं, लेकिन एक दिन यानी योग दिवस के दिन वह बदहवास हो जाते हैं। सुबह-सुबह उठना पड़ता है। सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम स्थल पर मौजूदगी अनिवार्य होती है। कितने ही उत्साही कार्यकर्ता होते हैं, जो योग करने से पहले उन्हें घेर लेते हैं। ऐसे में उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता है। उनके पांव लड़खड़ाने लगते हैं। एक यही दिन होता है, जब वह चाहते हैं कि आयोजन में मीडिया की मौजूदगी न हो।

मुझे पिछले साल के योग दिवस का स्मरण हो आया। इलाके के सबसे बड़े नेता वही माने जाते हैं, सो उन्हें योग करने के लिए सबसे आगे जगह मिली थी। शुरुआत सूर्य नमस्कार से हुई, लेकिन उनके पांव ऐसे लड़खड़ाए कि वह संभल नहीं पाए और धराशायी हो गए। फोटोग्राफर फोटो खींच रहे थे। विडियोग्राफर विडियो बना रहे थे। यूट्यूबर मुस्तैदी से आयोजन कवर कर रहे थे। सभी को मसाला मिल गया।
लेकिन इस बार तो नेता जी आत्मविश्वास से लबरेज दिखाई दे रहे थे। आयोजन में समय से पहले उपस्थित हो गए थे। आखिर मामला क्या है, मैं विस्मित था। मैंने नेता जी की काया देखी, जो पिछले साल से भारी थी। हालांकि देशभक्ति भी पिछले साल की तुलना में बढ़ी हुई दिख रही थी। आयोजन तय समय पर शुरू हुआ, लेकिन तब तक नेता जी अंतर्ध्यान हो चुके थे। ऐसा कैसे हो सकता है? अब तक रहस्य दोगुना हो चुका था। तभी एक यूट्यूबर मेरे कान में फुसफुसाया- 'आसनों का आसन, शवासन '। मैंने देखा कि नेता जी शवासन में चित लेटे थे और फोटोग्राफर उनकी धड़ाधड़ तस्वीरें खींच रहे थे!