स्मार्ट शहरों को चाहिए सुरक्षित इमारतें

नवभारतटाइम्स.कॉम
smart cities need safe buildings lessons from lucknow fire fail safe design and manual backup mandatory
लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया। आग और धुएं से बचने के लिए कई छात्र खिड़कियों से कूद गए, जबकि कुछ लोग भीतर ही फंसे रह गए। यह त्रासदी केवल एक दुर्घटना नहीं, हमारी सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन प्रणाली की गंभीर विफलता का परिणाम है।

फेल-सेफ जरूरी । हाल के बरसों में चलती कारों और बहुमंजिला इमारतों में आग लगने की घटनाओं में इलेक्ट्रॉनिक लॉक, बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन सिस्टम के फेल होने से लोग बाहर नहीं निकल सके। सवाल उठता है कि आधुनिक तकनीक में फेल-सेफ डिजाइन और मैन्युअल बैकअप को तवज्जो क्यों नहीं दी जा रही? तकनीक का उद्देश्य सुविधा और सुरक्षा है, इसलिए हर स्वचालित व्यवस्था में आपातकाल के लिए वैकल्पिक मैन्युअल एग्जिट अनिवार्य होना चाहिए।
इमरजेंसी एग्जिट । पहले की गाड़ियों की तरह नए जमाने के वाहनों में भी कम से कम एक दरवाजा ऐसा होना चाहिए, जो बिजली आपूर्ति बंद होने पर भी खुल सके। इसके अलावा, इमरजेंसी ग्लास ब्रेकर और सीट बेल्ट कटर भी होने चाहिए। इसी तरह, भवनों के फायर ऑडिट में यह सुनिश्चित किया जाए कि बिजली या आग की स्थिति में स्वचालित सिस्टम लोगों को न फंसाए। इमरजेंसी एग्जिट के दरवाजे हमेशा बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक अनुमति के भीतर से आसानी से खुलने चाहिए।

नियमित अभ्यास जरूरी । देश के अधिकतर बैंक आज भी सुरक्षा कारणों से पूरी तरह इलेक्ट्रिक एग्जिट पर भरोसा नहीं करते। यही मानक मॉल, स्कूल, कोचिंग संस्थानों और कार्यालयों में भी अपनाना होगा। फायर सेफ्टी नियमित अभ्यास का विषय है। संस्थानों में हर महीने फायर ड्रिल अनिवार्य होनी चाहिए। कर्मचारियों के साथ-साथ सभी स्टूडेंट्स को भी सुरक्षा उपकरणों के उपयोग की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।

जवाबदेही स्पष्ट हो । हर भवन में बड़े, स्पष्ट और बहुभाषी संकेतक होने चाहिए, ताकि आपदा के समय लोग सुरक्षित निकास तक आसानी से पहुंच सकें और भगदड़ न मचे। अभिभावकों को भी स्कूल, कॉलेज या कोचिंग चुनते समय फायर सेफ्टी, एग्जिट प्लान और आपदा प्रबंधन की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। दुर्घटनाओं का दोष केवल शॉर्ट सर्किट या बिजली विभाग पर डालने के बजाय मकान मालिकों, फायर सेफ्टी एजेंसियों और संबंधित विभागों की जवाबदेही पहले से स्पष्ट और सुनिश्चित होनी चाहिए।

सुरक्षा भी जरूरी । भारत तेजी से स्मार्ट हो रहा है। स्मार्ट शहरों की पहचान केवल आधुनिक तकनीक नहीं, संकट के समय लोगों की सुरक्षा है। तकनीक तभी सफल है, जब वह सुविधा के साथ सुरक्षित निकासी भी सुनिश्चित करे। सरकार, नियामक संस्थाओं, भवन निर्माताओं, शिक्षण संस्थानों और लोगों को मिलकर जवाबदेही तय करनी होगी। अब समय स्मार्ट के साथ सुरक्षित को भी तवज्जो देना होगा।

(लेखक विज्ञानपीडिया के संस्थापक हैं)