ईको सिटी सोसायटी के हैंडओवर में देरी पर विवाद

नवभारत टाइम्स

सेक्टर-137 स्थित ईको सिटी सोसायटी में मेंटिनेंस हैंडओवर को लेकर विवाद बढ़ गया है। निवासियों और एओए का आरोप है कि बिल्डर एन.सी.एल.ए.टी. के आदेश के बावजूद प्रक्रिया शुरू नहीं कर रहा है। बिल्डर पर नए क्लॉज जोड़ने और 'नो ड्यूज' एफिडेविट पर हस्ताक्षर का दबाव बनाने का भी आरोप है। आवश्यक सेवाओं में बाधा की शिकायतें भी हैं।

eco city society handover delay builder accused of imposing new clauses and disrupting amenities
नोएडा के सेक्टर-137 में ईको सिटी सोसायटी में मेंटिनेंस हैंडओवर को लेकर बिल्डर और निवासियों के बीच घमासान मचा हुआ है। NCLAT कोर्ट ने 25 मार्च तक मेंटिनेंस का काम निवासियों की एसोसिएशन (AOA) को सौंपने का आदेश दिया था, लेकिन बिल्डर कंपनी वाईजी एस्टेट लिमिटेड और उसकी मेंटिनेंस एजेंसी सुपरटेक अभी तक टस से मस नहीं हुई है। बिल्डर पर आरोप है कि वह हैंडओवर से पहले एक नया क्लॉज जोड़ने का दबाव बना रहा है, जिसमें 25 फरवरी 2026 के बाद की किसी भी जिम्मेदारी से उसे मुक्त कर दिया जाए। निवासियों का कहना है कि बिल्डर पानी की सप्लाई जैसी जरूरी सेवाओं में भी बाधा डाल रहा है और डीजी रिचार्ज के नाम पर पैसे लेकर सिस्टम में अपडेट नहीं कर रहा है। इस मामले में थाना सेक्टर-142 में शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

ईको सिटी सोसायटी के निवासी बिल्डर के रवैये से बेहद नाराज हैं। NCLAT कोर्ट ने 23 फरवरी 2026 को एक अहम फैसला सुनाया था। कोर्ट ने बिल्डर को आदेश दिया था कि वह 30 दिनों के अंदर सोसायटी का मेंटिनेंस यानी रखरखाव का काम AOA को सौंप दे। यह समय सीमा 25 मार्च को खत्म हो गई है। लेकिन बिल्डर कंपनी वाईजी एस्टेट लिमिटेड और उसकी मेंटिनेंस एजेंसी सुपरटेक ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया है।
AOA के उपाध्यक्ष ओम दत्त शर्मा ने बताया कि बिल्डर हैंडओवर से पहले एक नई शर्त थोपने की कोशिश कर रहा है। इस शर्त के मुताबिक, बिल्डर 25 फरवरी 2026 के बाद की किसी भी आर्थिक या गैर-आर्थिक जिम्मेदारी से खुद को बरी कर लेना चाहता है। निवासियों ने इस मांग को सरासर गलत और अनैतिक बताया है। इसके अलावा, बिल्डर AOA पर 'नो ड्यूज' एफिडेविट पर हस्ताक्षर करने का दबाव भी बना रहा है।

निवासियों का यह भी आरोप है कि बिल्डर जानबूझकर सोसायटी की जरूरी सेवाओं में रुकावट पैदा कर रहा है। कई टावरों में पानी की सप्लाई ठीक से नहीं हो रही है। पहले लिफ्ट सेवाएं भी बंद कर दी गई थीं। इतना ही नहीं, डीजी (डीजल जनरेटर) के रिचार्ज के नाम पर निवासियों से पैसे लिए गए, लेकिन उन्हें सिस्टम में अपडेट नहीं किया गया। AOA पदाधिकारियों को शक है कि आईएफएमएस (इंटिग्रेटेड फैसिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम) और अन्य फंड में भी गड़बड़ी की गई है।

इस पूरे मामले को लेकर निवासियों ने थाना सेक्टर-142 में कई शिकायतें दर्ज कराई हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि अब तक इन शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। निवासियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन करवाया जाए और जल्द से जल्द मेंटिनेंस हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी कराई जाए। इससे सोसायटी में हालात सामान्य हो सकेंगे।

वहीं, इस मामले पर बिल्डर पक्ष की ओर से नीतीश अरोड़ा ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि निवासियों पर मेंटिनेंस को लेकर कुछ बकाया राशि है। इस संबंध में प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी 25 मार्च तक का समय है और इससे पहले हैंडओवर का काम पूरा कर लिया जाएगा।