ग्रेडिंग पर रार, मूल्यांकन ड्यूटी पर उठे सवाल

नवभारत टाइम्स

यूपी बोर्ड 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य पर विवाद शुरू हो गया है। राजकीय शिक्षक संघ ने हाईस्कूल के प्रधानाचार्यों की ड्यूटी उनके पद की गरिमा के विपरीत लगाए जाने पर रोष जताया है। संघ का आरोप है कि प्रधानाचार्यों को जूनियर अधिकारियों के अधीन काम करने को मजबूर किया जा रहा है।

up board evaluation row over principals duty fear of evaluation work being affected
यूपी बोर्ड 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम शुरू होने से पहले ही एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश ने बोर्ड के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है कि हाईस्कूल के प्रधानाचार्यों को उनके पद की गरिमा के खिलाफ जाकर ड्यूटी पर लगाया जा रहा है। संघ का आरोप है कि प्रधानाचार्यों को अंकेक्षण (मूल्यांकन) जैसे कामों में लगाकर उन्हें अपने से जूनियर अधिकारियों के नीचे काम करने पर मजबूर किया जा रहा है। इस मामले को लेकर प्रधानाचार्यों में भारी नाराजगी है और अगर इसका समाधान नहीं निकला तो मूल्यांकन का काम प्रभावित हो सकता है।

राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय और प्रांतीय महामंत्री अरुण यादव ने शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों को चिट्ठी लिखकर इस गड़बड़ी को ठीक करने की मांग की है। संघ का कहना है कि पिछले सालों में हाईस्कूल के प्रधानाचार्यों को उनके विषय के हिसाब से डीएचई (District Head Examiner) के पद पर लगाया जाता था। लेकिन इस बार प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली और मेरठ के क्षेत्रीय कार्यालयों ने उन्हें छोटे पदों पर ड्यूटी दे दी है।
प्रधानाचार्यों में इस बात को लेकर काफी गुस्सा है। वे महसूस कर रहे हैं कि उनके पद का सम्मान नहीं किया जा रहा है। संघ ने साफ कहा है कि प्रधानाचार्यों की ड्यूटी उनके पद की शान के मुताबिक ही लगाई जानी चाहिए। साथ ही, इस लापरवाही की जांच भी होनी चाहिए कि किसके कहने पर प्रधानाचार्यों को जूनियरों के अधीन काम करने के लिए कहा गया। यह स्थिति बोर्ड की परीक्षाओं के मूल्यांकन प्रक्रिया में बाधा डाल सकती है।