22 मार्च से होगा 'व्हाइट स्वान' का आगाज़

नवभारत टाइम्स

लखनऊ में 22 से 25 मार्च तक 'व्हाइट स्वान आर्ट फेस्टिवल' का आयोजन होगा। यह आयोजन उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार में होगा। इसमें कला, संगीत और स्वाद का संगम देखने को मिलेगा। महोत्सव में उभरते कलाकारों को मंच मिलेगा। लखनऊ के 'सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी' को बढ़ावा देने के लिए 'कुलीनरी आर्काइव्स' पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

white swan art festival from march 22 a unique confluence of art music and taste
लखनऊ में 22 से 25 मार्च तक उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार में ' व्हाइट स्वान आर्ट फेस्टिवल ' का आयोजन होने जा रहा है। यह महोत्सव कला, संगीत और स्वाद का एक अनूठा संगम होगा। महोत्सव की संस्थापक और क्यूरेटर डॉ. अंजली निगम ने बताया कि इस बार अभिलेखागार को 'भविष्य की प्रयोगशाला' बनाया जाएगा। यहां 'रिस्पॉन्सिबल आर्ट' के ज़रिए नए कलाकारों, आर्ट स्कूल के छात्रों और ज़रूरतमंद प्रतिभाओं को एक बड़ा मंच मिलेगा। साथ ही, लखनऊ को मिली यूनेस्को 'सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी' की पहचान को और मज़बूत करने के लिए इस बार 'कुलीनरी आर्काइव्स' पर खास ध्यान दिया गया है।

इस चार दिवसीय उत्सव में लखनऊ के उन खास शाकाहारी व्यंजनों को फिर से ज़िंदा किया जाएगा जो समय के साथ कहीं खो गए थे। डॉ. अंजली निगम का कहना है कि अभिलेखागार को अक्सर पुरानी चीज़ों की जगह समझा जाता है, लेकिन इस बार हम इसे भविष्य की ओर ले जा रहे हैं। यह महोत्सव उभरते कलाकारों को एक ऐसा मंच देगा जहाँ वे अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें।
उत्सव के तीसरे दिन, यह कार्यक्रम बड़े हॉल से निकलकर 'पायसम' के विशेष बच्चों और ज़रूरतमंद युवाओं के बीच पहुंचेगा। डॉ. निगम का मानना है कि दुनिया में शांति की शुरुआत उन बच्चों की मुस्कान से होती है जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। कलाकारों का इन बच्चों के साथ जुड़ना यह साबित करेगा कि कला की भाषा पर सबका बराबर हक़ है।

यह 'व्हाइट स्वान आर्ट फेस्टिवल' सिर्फ एक कला प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह समाज के ज़रूरतमंद तबकों को कला से जोड़ने का एक प्रयास भी है। लखनऊ के स्वादिष्ट व्यंजनों को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ, यह महोत्सव कला के ज़रिए सामाजिक समानता को भी बढ़ावा देगा। यह उत्सव कला, संस्कृति और समाज को एक साथ लाने का एक शानदार मौका है।