दिल्ली में 20 मिनट देख सकेंगे चंद्र ग्रहण

नवभारत टाइम्स

मंगलवार को चंद्र ग्रहण लगेगा। दिल्ली में यह ग्रहण करीब 20 मिनट तक दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक काल सुबह से शुरू हो जाएगा। इस दौरान मंदिर बंद रहेंगे। ग्रहण का अंतिम चरण भारत के अधिकांश हिस्सों में दिखेगा। नॉर्थ-ईस्ट इंडिया और अंडमान निकोबार से यह सबसे अच्छी तरह से दिखाई देगा। छतरपुर मंदिर ग्रहण के दौरान भी खुला रहेगा।

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नई दिल्ली: मंगलवार, 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से पूर्ण चंद्र ग्रहण शुरू होगा, जिसका सूतक काल सुबह 6:20 बजे से लग जाएगा। इस ग्रहण के कारण अधिकांश मंदिर पूरे दिन बंद रहेंगे, केवल छतरपुर मंदिर खुला रहेगा जहाँ संत बाबा नागपाल का 101वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। भारत के अधिकांश हिस्सों में चंद्र ग्रहण अंतिम चरण में दिखाई देगा, जबकि नॉर्थ-ईस्ट इंडिया और अंडमान निकोबार से यह सबसे स्पष्ट दिखेगा। दिल्ली में यह ग्रहण लगभग 20 से 22 मिनट तक शाम 6:26 बजे से 6:48 बजे तक दिखाई देगा, जिसके लिए खुले स्थान पर जाने की सलाह दी गई है।

आईएमडी (भारतीय मौसम विज्ञान विभाग) के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:46 बजे तक रहेगा। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की होगी। सूतक काल, जो ग्रहण से 9 घंटे पहले यानी सुबह 6:20 बजे से शुरू हो जाएगा, के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसी कारण से, अधिकांश मंदिरों के कपाट सुबह की आरती के बाद बंद कर दिए जाएंगे और अगले दिन, 4 मार्च को ही खुलेंगे। आचार्यों ने इसे खंडग्रास चंद्र ग्रहण बताया है।
दिल्ली में छतरपुर मंदिर एक ऐसा अपवाद है जो ग्रहण के दौरान भी खुला रहेगा। मंदिर के सीईओ डॉ. किशोर चावला ने बताया कि ग्रहण का मंदिर पर कोई असर नहीं होगा। 3 मार्च को मंदिर खुला रहेगा और उस दिन संत बाबा नागपाल का 101वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। भक्त सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।

जो लोग चंद्र ग्रहण देखना चाहते हैं, उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि राजधानी दिल्ली में यह ग्रहण केवल 20 से 22 मिनट के लिए ही दिखाई देगा। दिल्ली में चंद्र ग्रहण शाम 6:26 बजे से शुरू होकर शाम 6:48 बजे तक रहेगा। इसे देखने के लिए किसी खुले स्थान पर जाना सबसे अच्छा होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस दौरान चंद्रमा की दृश्यता (visibility) बहुत कम क्षेत्र में होती है। ऊंची इमारतों और अन्य बाधाओं के कारण, चांद इन समयों के दौरान कई जगहों पर नजर नहीं आता। इस समय चंद्रमा क्षितिज के करीब होता है, यानी नीचाई पर रहता है।

यह चंद्र ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में अंतिम चरण में ही देखा जा सकेगा। इसका मतलब है कि ग्रहण का वह हिस्सा जो सबसे महत्वपूर्ण होता है, वह शायद सभी को स्पष्ट रूप से न दिखे। लेकिन नॉर्थ-ईस्ट इंडिया और अंडमान निकोबार जैसे क्षेत्रों से यह ग्रहण सबसे अच्छी तरह से दिखाई देगा। यह उन लोगों के लिए एक शानदार अवसर होगा जो इस खगोलीय घटना को करीब से देखना चाहते हैं।

ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। यह एक ऐसा समय माना जाता है जब कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। इसलिए, मंदिरों को इस अवधि के दौरान बंद रखने का निर्णय लिया गया है। सुबह की आरती सूतक काल शुरू होने से पहले ही कर ली जाएगी। इसके बाद, मंदिर के पट अगले दिन तक बंद रहेंगे। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और लोग इसका पालन करते हैं।

आचार्यों के अनुसार, यह एक खंडग्रास चंद्र ग्रहण है। खंडग्रास का मतलब है कि चंद्रमा का केवल एक हिस्सा ही पृथ्वी की छाया से ढका होगा, पूरा चंद्रमा नहीं। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण की तरह नहीं होता जहाँ पूरा चांद ढक जाता है। भारतीय समय के अनुसार, यह ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:46 बजे तक चलेगा। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की है, लेकिन दिखने का समय अलग हो सकता है।

सूतक काल सुबह 6:20 बजे से लागू हो जाएगा। इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य, जैसे कि शादी-विवाह या कोई नया काम शुरू करना, वर्जित माने जाते हैं। अधिकांश मंदिरों के कपाट भी इस दिन बंद रहेंगे। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यता है जिसका लोग पालन करते हैं।

दिल्ली में छतरपुर मंदिर उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है जो ग्रहण के दौरान भी खुला रहता है। इस बार भी यह मंदिर खुला रहेगा। मंदिर के सीईओ डॉ. किशोर चावला ने स्पष्ट किया कि ग्रहण का मंदिर पर कोई असर नहीं होगा। 3 मार्च को मंदिर खुला रहेगा और उस दिन संत बाबा नागपाल का 101वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। भक्त सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक इस कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। यह एक विशेष अवसर है जहाँ भक्त मंदिर में आकर उत्सव में भाग ले सकते हैं।