राज्यसभा चुनाव में BJP और कांग्रेस के बाद निर्दलीय की एंट्री

नवभारत टाइम्स

हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। बीजेपी के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध ने नामांकन दाखिल किया। एक निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल ने भी अपना पर्चा भरा है। दोनों सीटों पर पहुंचने के लिए 31-31 वोटों की आवश्यकता होगी। विधानसभा में बीजेपी के पास बहुमत है।

राज्यसभा चुनाव में BJP और कांग्रेस के बाद निर्दलीय की एंट्री
चंडीगढ़: हरियाणा से राज्यसभा की दो खाली हो रही सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध ने गुरुवार को अपना-अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। इसी के साथ, 2019 में विधानसभा चुनाव हार चुके सतीश नांदल ने भी एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है। बीजेपी के किरण चौधरी और राम चंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है।

नामांकन दाखिल करने से पहले बीजेपी उम्मीदवार संजय भाटिया ने मुख्यमंत्री सैनी से उनके आवास पर मुलाकात की। हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं। इनमें से बीजेपी के पास 48 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 37 विधायक हैं। इंडियन नैशनल लोकदल (INLD) के दो विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायक भी बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं। राज्यसभा में पहुंचने के लिए हर उम्मीदवार को 31 वोटों की जरूरत होगी।
सतीश नांदल ने 2019 में रोहतक जिले के गढ़ी-सांपला-किलोई सीट से कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए हरियाणा से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि नांदल का यह कदम राज्यसभा चुनाव के समीकरणों को कैसे प्रभावित करता है।

बीजेपी के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों के मजबूत उम्मीदवार हैं। विधानसभा में बीजेपी की स्थिति मजबूत होने के कारण संजय भाटिया के राज्यसभा पहुंचने की राह आसान मानी जा रही है। वहीं, कांग्रेस के पास पर्याप्त विधायक न होने के कारण करमवीर सिंह बौद्ध को निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। यह चुनाव हरियाणा की राजनीति में नए समीकरण भी बना सकता है।