AI से बीमारी का पता

नवभारत टाइम्स

वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है। यह एआई आधारित ब्लड टेस्ट लिवर की गंभीर बीमारियों का पता लगा सकता है। यह बीमारी के लक्षण दिखने से कई साल पहले ही पता चल जाएगा। इस लिक्विड बायोप्सी से रक्त में मौजूद डीएनए के टुकड़ों का अध्ययन किया जाएगा।

AI से बीमारी का पता
वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई AI-आधारित ब्लड टेस्ट की खोज की है जो लिवर की गंभीर बीमारियों का पता उनके लक्षण दिखने से कई साल पहले ही लगा सकती है। अमेरिका के जॉन्स हॉपकिन्स किमेल कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को विकसित किया है, जिसे 'लिक्विड बायोप्सी' कहा जा रहा है। यह टेस्ट खून में मौजूद कोशिकाओं से निकले डीएनए के छोटे-छोटे टुकड़ों, जिन्हें सेल-फ्री डीएनए (cfDNA) कहते हैं, का विश्लेषण करती है। इस खोज से लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी बीमारियों का शुरुआती चरण में ही पता लगाना संभव हो सकेगा, जिससे लिवर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

यह नई तकनीक खून के नमूनों में पाए जाने वाले cfDNA के आकार, संख्या और पूरे जीनोम में उनके फैलाव के पैटर्न का अध्ययन करती है। वैज्ञानिकों ने 1,500 से अधिक लोगों के रक्त नमूनों पर यह रिसर्च की। उन्होंने पाया कि cfDNA के टूटने और फैलने के खास पैटर्न लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान में मददगार हो सकते हैं। ये बीमारियां अक्सर लंबे समय तक चुपचाप बढ़ती रहती हैं और बाद में लिवर कैंसर का खतरा बढ़ा सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया, तो एक साधारण ब्लड टेस्ट से लिवर की बीमारी का समय रहते पता चल जाएगा। इससे डॉक्टर तुरंत इलाज शुरू कर पाएंगे और गंभीर समस्याओं, यहां तक कि लिवर कैंसर से भी बचा जा सकेगा। यह खोज लिवर रोगों के निदान और उपचार में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।