Social Media Ban For Children Karnataka And Andhra Pradeshs Initiative Whats The Reason Behind It
सख्ती, मगर संभलकर
नवभारत टाइम्स•
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सरकारें बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में हैं। भारत में बच्चों के बीच इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसके बुरे असर की चिंता जता रहे हैं। कई देशों ने पहले ही ऐसे कदम उठाए हैं।
कर्नाटक सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है, जबकि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 90 दिनों के भीतर सोशल मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। ये कदम बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए उठाए जा रहे हैं। भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत बड़ी है, जिसमें बच्चों की भी अच्छी खासी तादाद है और वे अपना ज्यादातर समय रील्स जैसी चीजों पर बिता रहे हैं।
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली आबादी वाला देश है, जहाँ 96 करोड़ से ज्यादा लोग इंटरनेट से जुड़े हैं। इनमें से 66% से ज्यादा लोग सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। सस्ता इंटरनेट लोगों को तेजी से जोड़ रहा है और डेटा की खपत दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा हो रही है। लेकिन चिंता की बात यह है कि इस बड़ी आबादी में बच्चों की संख्या भी काफी है और वे अपना कीमती समय मोबाइल पर रील्स देखने में बिता रहे हैं।भारत में लगभग हर चौथा बच्चा इंटरनेट का इस्तेमाल करता है, यहाँ तक कि 5 साल के बच्चे भी। 2021 के एक अध्ययन के अनुसार, 10 साल के 37% बच्चों के फेसबुक और 24% बच्चों के इंस्टाग्राम अकाउंट थे। सितंबर 2023 में हुए एक सर्वे में 66% माता-पिता ने माना कि उनके बच्चों को सोशल मीडिया की लत लग चुकी है। 46% माता-पिता ने बताया कि उनके बच्चे सोशल मीडिया पर तीन से छह घंटे बिताते हैं, जबकि 15% से ज्यादा बच्चे तो 6 घंटे से भी ज्यादा समय मोबाइल पर बिताते हैं।
सोशल मीडिया बच्चों के व्यवहार को किस तरह बदल रहा है, इसके उदाहरण हमें आए दिन हादसों के रूप में देखने को मिलते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया बच्चों को डिप्रेशन, चिंता और नींद न आने जैसी समस्याओं में धकेल सकता है। ऑनलाइन दुनिया में 'बॉडी शेमिंग' यानी किसी के शरीर को लेकर ताने मारना बहुत आम है, जिससे बच्चों के मन में आत्महत्या जैसे खतरनाक विचार भी आ सकते हैं। इसके अलावा, बच्चों में हिंसक व्यवहार भी बढ़ रहा है।
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने के मामले में ऑस्ट्रेलिया पहला देश था। हाल ही में इंडोनेशिया ने भी ऐसा ही ऐलान किया है। दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, फ्रांस और स्पेन जैसे देशों ने भी बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम करने के लिए अलग-अलग नियम बनाए हैं। भारत में यह ध्यान रखना होगा कि ऐसे कदम बच्चों को टेक्नोलॉजी से पूरी तरह दूर न कर दें। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि राज्य सरकारें अपने स्तर पर इस तरह के प्रतिबंधों को कैसे लागू करती हैं। यह एक बड़ी चुनौती होगी कि बच्चों को डिजिटल दुनिया के फायदों से वंचित किए बिना उनके नुकसान को कैसे कम किया जाए।