ग्रेनो में सरकारी अस्पतालों की कमी पर सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल

नवभारत टाइम्स

ग्रेनो में सरकारी अस्पतालों की कमी को लेकर सामाजिक संगठनों ने सरकार और प्राधिकरण पर सवाल उठाए हैं। शहर में बड़े सरकारी अस्पताल की मांग के बावजूद निजी अस्पतालों के लिए जमीन आवंटित हो रही है। इससे आम जनता के लिए सस्ती चिकित्सा सुविधा का संकट खड़ा हो गया है। सपा प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है।

social organizations protest against lack of government hospitals in grano allege promotion of private hospitals
ग्रेनो शहर में सरकारी अस्पतालों की भारी कमी को लेकर सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने सरकार और प्राधिकरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कई सालों से बड़े सरकारी अस्पताल की मांग के बावजूद, प्राधिकरण निजी अस्पतालों के लिए जमीन आवंटित कर रहा है, जिससे आम, निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए सस्ती और सुलभ चिकित्सा सुविधा का संकट पैदा हो गया है। सामाजिक संगठनों का आरोप है कि सरकार निजी अस्पतालों को बढ़ावा दे रही है, जबकि आम जनता के स्वास्थ्य की अनदेखी हो रही है। ग्रेटर नोएडा तेजी से विकसित हो रहा है और इसकी आबादी बढ़ रही है, लेकिन सरकारी मेडिकल सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। एक्टीव सिटीजन टीम के आलोक सिंह ने कहा कि ग्रेटर नोएडा की बढ़ती आबादी के अनुरूप सरकारी मेडिकल सुविधाएं विकसित नहीं हुई हैं।

सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने भी सीएम योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि सरकारी स्कूल और सरकारी अस्पताल बर्बाद किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री निजी अस्पताल का उद्घाटन करके उस जनता से ताली बजवा रहे हैं जिसकी हैसियत उस अस्पताल का बिल भरने की भी नहीं है। मुख्यमंत्री ग्रेटर नोएडा में प्राइवेट अस्पताल का उद्घाटन करने आए थे। प्रशासन ने बसें लगाकर थोड़ी सी भीड़ इकट्ठा की ताकि मुख्यमंत्री के भाषण पर ताली बजवाई जा सके। अस्पताल मालिकों ने जनता जनार्दन को पानी तक के लिए नहीं पूछा।
यह स्थिति आम लोगों के लिए चिंता का विषय है। जब शहर की आबादी तेजी से बढ़ रही है, तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होना चाहिए। लेकिन इसके बजाय, निजी अस्पतालों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे उन लोगों को परेशानी हो रही है जो महंगे निजी अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते। सरकारी अस्पतालों की कमी का मतलब है कि लोगों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ सकता है या फिर उन्हें निजी अस्पतालों के भारी बिलों का सामना करना पड़ सकता है।

सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकार की नीतियां आम जनता के स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं दे रही हैं। वे निजी क्षेत्र को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि आम लोगों की बुनियादी स्वास्थ्य जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।

सपा प्रवक्ता की टिप्पणी इस मुद्दे को और भी उजागर करती है। उनका कहना है कि सरकारी संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है और निजी अस्पतालों का उद्घाटन करके जनता को गुमराह किया जा रहा है। यह आरोप कि जनता को पानी तक नहीं पूछा गया, यह दर्शाता है कि निजी अस्पतालों का ध्यान केवल लाभ कमाने पर है, न कि लोगों की सेवा पर।

ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहर में, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत होना बहुत जरूरी है। यह न केवल नागरिकों को सस्ती और सुलभ चिकित्सा सुविधा प्रदान करेगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि सभी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिले, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।