सहकर्मी की गलती से मौत हुई तो राज्य जिम्मेदार: हाई कोर्ट

नवभारत टाइम्स

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। यदि किसी कर्मचारी की गलती से दूसरे कर्मचारी की मृत्यु होती है तो इसके लिए राज्य को उत्तरदायी माना जाएगा। कोर्ट ने सोनभद्र निवासी सरिता देवी की याचिका स्वीकार की है। उनके पति की रेलवे में बिजली की मरम्मत के दौरान पोल से गिरकर मौत हो गई थी।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर किसी कर्मचारी की गलती से दूसरे कर्मचारी की मौत हो जाती है, तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी। कोर्ट ने यह टिप्पणी सोनभद्र की सरिता देवी के मामले में की, जिनके पति की रेलवे में काम करते समय मौत हो गई थी। कोर्ट ने सरिता देवी की मुआवजे की मांग को स्वीकार करते हुए मामले को नए सिरे से मुआवजे के निर्धारण के लिए भेजा है।

यह मामला सोनभद्र के रेनुकूट रेलवे में काम करने वाले एक सीनियर टेक्नीशियन (इलेक्ट्रिकल) से जुड़ा है। आठ अप्रैल 2023 की सुबह, वह अपने सीनियर सेक्शन इंजिनियर (इलेक्ट्रिकल) के अधीन काम कर रहे थे। वे एक फॉल्ट ठीक करने के लिए पोल पर चढ़े थे, लेकिन पावर शट डाउन नहीं किया गया था। इस वजह से उन्हें करंट लग गया और वे नीचे गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
सरिता देवी का आरोप है कि मुआवजे की राशि तय करते समय उनकी बात नहीं सुनी गई और न ही सबूतों पर ध्यान दिया गया। उन्हें सिर्फ 10,16,700 रुपये का मुआवजा मिला, जबकि वह 60 लाख रुपये की मांग कर रही थीं। उनका कहना है कि मौत का मुख्य कारण पावर शट डाउन न होना था।

हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंदन की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की गलती से दूसरे कर्मचारी की मृत्यु होती है तो इसके लिए राज्य को उत्तरदायी माना जाएगा। कोर्ट ने इस मामले को आयुक्त के पास भेज दिया है। आयुक्त को निर्देश दिया गया है कि वे सरिता देवी को सबूत और दस्तावेज पेश करने के लिए नोटिस जारी करें।

इसके बाद, आयुक्त को मुआवजे और क्षतिपूर्ति की राशि को नए सिरे से तय करना होगा। यह भुगतान एक महीने के अंदर किया जाएगा। खास बात यह है कि इस भुगतान पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी मिलेगा। यह फैसला उन कर्मचारियों के परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है, जिनकी काम के दौरान किसी और की गलती से मौत हो जाती है। यह फैसला यह भी सुनिश्चित करता है कि ऐसे मामलों में उचित मुआवजे का भुगतान हो और पीड़ित परिवारों को न्याय मिले। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना कोई भी फैसला नहीं लिया जाएगा।