...तो अब भी फर्ज़ी अभिलेखों पर हो रही अध्यापकों की नियुक्ति!

नवभारत टाइम्स

उत्तर प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षकों की नियुक्तियां अब भी हो रही हैं। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेनशर्मा ने इस मामले में तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। एसटीएफ पहले से ही ऐसे शिक्षकों की जांच कर रही है। कई शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है।

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लखनऊ: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षकों की नियुक्तियों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेनशर्मा ने इस गंभीर मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिए हैं कि वे वर्तमान और पूर्व में हुए ऐसे सभी मामलों की जांच करें। यह जांच एक महीने के भीतर पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी होगी। एसटीएफ पहले से ही ऐसे शिक्षकों की जांच कर रही है, जिनमें 200 से अधिक को बर्खास्त किया जा चुका है और कई जिलों में जांच जारी है। यह मामला हाई कोर्ट भी पहुंचा था, जिसने ऐसे शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

अपर मुख्य सचिव ने डीजी स्कूल शिक्षा को भेजे अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि संदिग्ध शिक्षकों के नाम, उनकी नियुक्ति की तारीख, उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए फर्जी दस्तावेज, वे दस्तावेज किस संस्था से जारी हुए थे, और उन शिक्षकों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है, इसकी पूरी जानकारी एक प्रोफार्मा में भरकर भेजी जाए। उन्होंने यह भी पूछा है कि इन मामलों की वर्तमान स्थिति क्या है। यह रिपोर्ट एक महीने में उपलब्ध करानी होगी।
यह बात सामने आई है कि पहले भी शासन ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त हुए सहायक अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे और जांच भी हुई थी। लेकिन इसके बावजूद, अब भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाई गई है। अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि संदेहास्पद अभिलेखों की जांच बहुत जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्व और वर्तमान में फर्जी अभिलेखों के आधार पर नियुक्त हुए संदिग्ध अध्यापकों की एक सूची एक महीने के अंदर उपलब्ध कराई जाए।

दरअसल, फर्जी दस्तावेजों पर नियुक्ति पाने वाले प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों की जांच स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) पहले से ही कर रही है। इस जांच के तहत विभिन्न जिलों में अब तक 200 से ज्यादा ऐसे शिक्षकों को नौकरी से निकाला जा चुका है। कई जिलों में यह जांच अभी भी चल रही है। इसी बीच, यह मामला अदालत तक पहुंचा। हाई कोर्ट ने भी ऐसे शिक्षकों की जांच करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए थे।

कोर्ट के इन्हीं निर्देशों के क्रम में अपर मुख्य सचिव ने यह जांच का आदेश दिया है। उन्होंने जो प्रोफार्मा संलग्न किया है, उसमें संदिग्ध अध्यापक का पूरा ब्यौरा मांगा गया है। इसमें यह भी पूछा गया है कि फर्जी अभिलेख किस संस्था ने जारी किए थे और उस अध्यापक के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। साथ ही, उसकी वर्तमान स्थिति क्या है, यह भी जानना जरूरी है। इस पूरी जानकारी को प्रोफार्मा में भरकर भेजने को कहा गया है।

सेनशर्मा ने इस बात पर चिंता जताई कि पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे और कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन फिर भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के प्रकरण संज्ञान में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि संदेहास्पद अभिलेखों की जांच कर ली जाए। पूर्व में और वर्तमान में फर्जी अभिलेखों के आधार पर नियुक्त संदिग्ध अध्यापकों की सूची एक महीने में उपलब्ध करवाई जाए। यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है कि शिक्षा प्रणाली में किसी भी तरह की धांधली न हो और योग्य शिक्षकों को ही अवसर मिले।