Teacher Organizations Unite Against Tet Compulsoriness Announce Nationwide Protest From March 9
शिक्षक संगठन मिलकर करेंगे TET अनिवार्यता का विरोध
नवभारत टाइम्स•
शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का ऐलान किया है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले यह लड़ाई लड़ी जाएगी। नौ मार्च से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अन्य को पोस्टकार्ड और ईमेल भेजे जाएंगे। तेरह अप्रैल को मशाल जुलूस और तीन मई को लखनऊ में प्रदर्शन होगा।
लखनऊ: शिक्षकों ने टीईटी (TET) की अनिवार्यता के खिलाफ अपनी लड़ाई को अब राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का फैसला किया है। इस सिलसिले में शुक्रवार को कई शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक अहम बैठक की। इस बैठक में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ का गठन किया गया और इसी बैनर तले अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने का ऐलान किया गया। शिक्षकों ने चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने की योजना बनाई है, जिसकी शुरुआत इसी महीने नौ मार्च से होगी। अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो मॉनसून सत्र के दौरान संसद का घेराव भी किया जाएगा।
आंदोलन की रूपरेखा के तहत, नौ मार्च को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड और ईमेल भेजे जाएंगे। इसके बाद 13 अप्रैल को प्रदेश के विभिन्न जिलों में मशाल जुलूस निकाले जाएंगे। तीन मई को लखनऊ में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इन सभी प्रयासों के बावजूद अगर सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो मॉनसून सत्र के दौरान संसद भवन का घेराव करने की चेतावनी दी गई है।इस महत्वपूर्ण बैठक में बीटीसी शिक्षक असोसिएशन के संयोजक विनीत कुमार सिंह, एससी-एसटी संघ की डॉ. अलका राजवंशी, महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष अपर्णा, शालिनी मिश्रा, प्राथमिक शिक्षक संघ के बृजेश मौर्य, संजय मौर्य, और जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रमोद कुमार जैसे कई प्रमुख संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। इन सभी ने मिलकर टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने का संकल्प लिया है। शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर तब तक संघर्ष करते रहेंगे जब तक उन्हें सफलता नहीं मिल जाती। यह आंदोलन शिक्षकों के भविष्य और उनके अधिकारों से जुड़ा हुआ है।