Attempt To Divide Bank Employees Joint Bank Union Forum Strongly Opposes Pli Scheme
‘PLI के नाम पर बैंक कर्मियों को बांटने की कोशिश’
नवभारत टाइम्स•
संयुक्त बैंक संघ मंच केंद्र सरकार की नई प्रोत्साहन राशि योजना का कड़ा विरोध कर रहा है। मंच का आरोप है कि यह योजना बैंक कर्मियों में विभाजन पैदा करेगी। जून 2025 में स्थगित योजना फरवरी 2026 में फिर से लागू की गई। बैंक कर्मी काली पट्टी बांधकर विरोध करेंगे और अतिरिक्त सहयोग वापस लेंगे।
लखनऊ: संयुक्त बैंक संघ मंच ने केंद्र सरकार की नई कार्य-आधारित प्रोत्साहन राशि योजना का कड़ा विरोध करते हुए आंदोलन का ऐलान कर दिया है। मंच का आरोप है कि यह योजना बैंक कर्मियों के बीच फूट डालने की कोशिश है। यह योजना व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित है और इसमें चतुर्थ से सप्तम श्रेणी तक के अधिकारियों को अलग श्रेणी में रखा गया है। इस योजना के तहत अधिकारियों को पांच वर्गों में बांटकर शून्य से सौ प्रतिशत तक प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जिससे कार्यस्थल पर भारी असमानता फैलेगी। वर्तमान में जहां अधिकतम पंद्रह दिनों के वेतन का प्रावधान है, वहीं नई योजना में इसे पूरे साल के बराबर करने की तैयारी है, जो सरासर गलत है।
जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि यह नई व्यवस्था बिना किसी से सलाह-मशविरा किए एकतरफा थोपी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना बैंक कर्मचारियों के बीच कृत्रिम विभाजन पैदा करने का प्रयास है। इस योजना में अधिकारियों को अलग-अलग वर्गों में बांटकर उनके प्रदर्शन के आधार पर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि शून्य से लेकर सौ प्रतिशत तक हो सकती है। इससे दफ्तरों में भेदभाव बढ़ेगा। अभी तक अधिकतम पंद्रह दिन के वेतन के बराबर प्रोत्साहन राशि मिलती है, लेकिन नई योजना में इसे पूरे साल के वेतन के बराबर करने की बात कही जा रही है।संयोजक ने आंदोलन की रूपरेखा बताते हुए कहा कि जून 2025 में उप मुख्य श्रम आयुक्त ने इस योजना को आगे की चर्चा तक रोकने का आदेश दिया था। लेकिन सरकार ने फरवरी 2026 में इसे फिर से लागू करने का फरमान जारी कर दिया। 9 मार्च को हुई सुलह बैठक की सलाह को भी नजरअंदाज करना सरकार के सीधे टकराव वाले रवैये को दिखाता है।
मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। इसके तहत सभी अधिकारी और कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। वे तय समय के बाद किसी भी अतिरिक्त काम में सहयोग नहीं करेंगे। अधिकारी शाम छह बजे के बाद प्रबंधन के फोन नहीं उठाएंगे और सभी आधिकारिक संवाद समूहों से बाहर निकल जाएंगे।
मंच ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार अपनी जिद नहीं छोड़ेगी तो बैंककर्मी देशव्यापी हड़ताल पर चले जाएंगे। इस हड़ताल की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। यह नई योजना बैंक कर्मचारियों के लिए एक बड़ा झटका है। यह योजना न केवल कर्मचारियों के बीच असमानता पैदा करेगी, बल्कि उनके मनोबल को भी गिराएगी। बैंक कर्मचारी इस योजना को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। वे अपनी मांगों को लेकर तब तक संघर्ष करते रहेंगे जब तक सरकार उनकी बात नहीं सुनती। यह आंदोलन बैंक कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए है।