पीटीआई, नई दिल्ली: NCLAT ने सोमवार को अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड की अर्जी को खारिज कर दिया। अर्जी में अदाणी ग्रुप की जीत को चुनौती दी गई थी। अदाणी ग्रुप ने दिवालिया हो चुकी रियल एस्टेट कंपनी जयप्रकाश असोसिएट्स लिमिटेड ( JAL ) को खरीदने की बोली जीती है। JAL के पास ही भारत का इकलौता फॉर्मूला वन (F1) सर्किट है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में दखल देने से मना कर दिया था और सुनवाई जल्द पूरी करने को कहा था। सोमवार के इस फैसले के बाद अब अदाणी ग्रुप के लिए JAL को टेकओवर करने का रास्ता साफ हो गया है।
NCLAT की बेंच ने फैसला सुनाया कि कर्जदाताओं की कमिटी (CoC) का फैसला सही था। कमिटी ने JAL के लिए वेदांता के प्लान के मुकाबले अदाणी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को बेहतर माना था। इससे पहले NCLT ने भी इस फैसले पर मुहर लगाई थी, जिसे वेदांता ने ऊपरी अदालत (NCLAT) में चुनौती दी थी।
NCLAT ने अपने आदेश में कहा, अपील करने वाली कंपनी (वेदांता) ने ऐसा कोई ठोस आधार पेश नहीं किया जिससे NCLT के फैसले में दखल दिया जाए। इस अपील में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। अदालत ने साफ किया कि कर्जदाताओं की कमिटी का फैसला उनकी व्यावसायिक सूझबूझ पर आधारित था। उन्होंने सभी पहलुओं पर विचार करके ही यह निर्णय लिया है।
बता दें कि 57,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज न चुका पाने की वजह से जून 2024 में JAL के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस कंपनी को खरीदने के लिए 28 कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी, जिनमें से 6 कंपनियों ने आखिरी बोली लगाई। अदाणी और वेदांता इस रेस में सबसे आगे थे। अदाणी के प्रस्ताव में तुरंत मिलने वाला पैसा और कुल वैल्यू ज्यादा थी। नवंबर 2025 में कर्जदाताओं ने 93.81 प्रतिशत वोटों के साथ अदाणी के प्लान को मंजूरी दे दी थी।




