NBT रिपोर्ट: अगर इस महीने आपकी टेक-होम सैलरी (हाथ में आने वाला पैसा) थोड़ी कम आई है, तो आप अकेले नहीं हैं। कई कर्मचारियों की सैलरी में ऐसी ही कटौती देखी जा रही है। अब कंपनियां समझाने में जुटी हैं कि नए लेबर कोड की वजह से ऐसा क्यों हो रहा है।
क्या है वजह? : ET के मुताबिक, सैलरी में यह कमी दरअसल इसके स्ट्रक्चर में हुए बदलाव की वजह से है। अब कर्मचारियों का भविष्य निधि (PF) में योगदान बढ़ गया है। क्योंकि अब इसकी गणना बढ़ी हुई बेसिक सैलरी के आधार पर की जा रही है (बेसिक का 12%)। इसी तरह, ग्रेच्युटी के लिए जमा होने वाला पैसा भी बढ़ गया है। यह भी अब बढ़ी हुई बेसिक सैलरी से जुड़ गया है।
क्या हुआ असर? : AZB & Partners के विक्रम श्रॉफ का कहना है कि नए लेबर कोड के मुताबिक, आपके कुल पैकेज (CTC) का कम से कम 50% हिस्सा 'वेजेस' यानी मूल वेतन माना जाना चाहिए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी कंपनी ने पहले सैलरी को कैसे बांटा हुआ था। उन्होंने कहा, जिन मामलों में बेसिक सैलरी कम थी, वहां कंपनियों ने इसे बढ़ाकर 50% कर दिया है ताकि नए नियमों का पालन हो सके। इसकी वजह से सैलरी के दूसरे हिस्से कम हो गए, लेकिन PF का योगदान बढ़ गया। यही कारण है कि हाथ में आने वाली नेट सैलरी कम हो गई है।
क्या है बदलाव? : कर्मचारियों को अब अपनी सैलरी में यह बदलाव साफ दिखने लगा है। आईटी प्रोफेशनल दीपक सी. ने बताया कि उनकी सैलरी में ग्रेच्युटी का हिस्सा अब दोगुना हो गया है। उनके सालाना पैकेज (CTC) में 90,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई, लेकिन उसमें से 40,000 रुपये ग्रेच्युटी में जा रहे हैं। पहले यह सिर्फ 20,000 रुपये था। उन्होंने बताया कि उनकी असल बढ़ोतरी प्रभावी रूप से 50,000 रुपये ही रह गई, जो PF और अन्य हिस्सों में बंट गई।



