BK में लिफ्ट ‘बीमार’, इंजीनियर के इंतज़ार में मरीजों का फूल रहा दम

नवभारतटाइम्स.कॉम

फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल की लिफ्ट खराब है। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी दिक्कत हो रही है। अस्पताल की एकमात्र लिफ्ट 16 साल पुरानी है और तकनीकी खराबी के कारण बंद है। इंजीनियर के आने का इंतजार है। लिफ्ट के पुर्जों या वायरिंग में खराबी की जांच बाकी है।

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- समस्या लिफ्ट के पुर्जों में है या वायरिंग में, इसकी जांच अभी बाकी

- 16 साल पहले लगाई गई है यह लिफ्ट

NBT रिपोर्ट, फरीदाबाद

बीके सिविल अस्पताल में पिछले कुछ समय से लिफ्ट बंद होने के कारण मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की एकमात्र लिफ्ट, जो करीब 16 वर्षों से लगातार उपयोग में थी, तकनीकी खराबी के चलते एहतियातन बंद कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया, लेकिन अब तक खराबी की सटीक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। समस्या लिफ्ट के पुर्जों में है या वायरिंग में, इसकी जांच अभी बाकी है।

रुका पड़ा है मरम्मत कार्य

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार लिफ्ट की मेंटीनेंस एएमसी (एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट) के तहत होती है और संबंधित एजेंसी को सूचना दे दी गई है। सोमवार को इंजीनियर के आने की बात कही गई थी, लेकिन दोपहर 2 बजे तक भी कोई इंजीनियर मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका।

महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों पर सबसे ज्यादा असर

लिफ्ट बंद होने का सबसे अधिक असर महिला मरीजों, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों पर पड़ रहा है। उन्हें अस्पताल के अलग-अलग फ्लोर तक पहुंचने के लिए रैंप का सहारा लेना पड़ रहा है, जो न सिर्फ थकाऊ है बल्कि जोखिम भरा भी साबित हो रहा है। तीमारदारों का कहना है कि मरीजों को स्ट्रेचर या वीलचेयर पर रैंप से ऊपर-नीचे ले जाना बेहद मुश्किल और खतरनाक है। कई बार फिसलने या संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है, जिससे मरीजों की स्थिति और बिगड़ सकती है।

जल्द समाधान की मांग

स्थानीय लोगों और मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि लिफ्ट की मरम्मत जल्द से जल्द कराई जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी समस्या से बचने के लिए अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।अस्पताल प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि इंजीनियर के पहुंचते ही लिफ्ट को ठीक कराने का काम शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल मरीजों को राहत मिलने में देरी होती दिख रही है।