गठबंधन की चुनौतियां

नवभारतटाइम्स.कॉम

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सत्ता संभालते ही अपनी मजबूत छवि पेश की है। हालांकि, गठबंधन सरकार में बहुमत का छोटा अंतर और सहयोगियों की अलग प्राथमिकताएं उनके लिए बड़ी चुनौतियां हैं। राज्य की वित्तीय स्थिति को संभालना और चुनावी वादों को पूरा करना भी एक अहम काम होगा।

challenges of coalition government in tamil nadu economic pressure and political maneuvering for vijay

तमिल मूल के शब्द थलपति का अर्थ होता है सेनापति या नेता। सी जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ऑफिस में कुछ इस तरह शुरुआत की और पहले दिन ही यह संदेश दे दिया कि शक्ति के केंद्र वहीं होंगे। उन्होंने धड़ाधड़ जिस अंदाज में फैसले लिए, वह फिल्मों के जरिये बनाई गई उनकी सार्वजनिक छवि के अनुरूप है। हालांकि उन्हें गठबंधन सरकार की चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसका असर आगे चलकर सरकार के निर्णयों पर भी दिख सकता है।

समर्थन की वजह । विजय सरकार के पास बहुमत से केवल दो विधायक ज्यादा यानी 120 का समर्थन है। इसमें पांच सहयोगी दल हैं और इनके TVK के साथ आने की वजह विचारधारा से ज्यादा दूसरी है। लेफ्ट पार्टियों, CPI और CPM ने बाहर से समर्थन दिया है। उनका एक मकसद है, BJP व सहयोगियों को सत्ता से दूर रखना। सबसे पहले समर्थन देने का ऐलान करने वाली कांग्रेस ने भी यही वजह बताई है।

राजनीतिक दबाव । एक और पार्टी, VCK ने भी बाहर से सपोर्ट किया है और इसलिए ताकि राज्य में राष्ट्रपति शासन की नौबत न आए। इन दलों की रुचि विजय की सरकार बनवाने से ज्यादा AIADMK के नेतृत्व वाले गठबंधन को दूर रखना है। VCK तो अब भी DMK की अगुवाई वाले अलायंस का हिस्सा है। यह अजीब स्थिति है जहां एक पार्टी सरकार के साथ होते हुए विपक्षी गठबंधन के साथ भी होगी। इससे विजय सरकार पर लगातार दबाव बना रहेगा।

अलग प्राथमिकताएं । गठबंधन की पॉलिटिक्स वैसे भी मुश्किलों भरी होती है, जहां कई बार न चाहते हुए भी समझौते करने पड़ते हैं। कई बार साथी दलों की प्राथमिकताएं और उनके हित सरकार के लक्ष्यों से मेल नहीं खाते। विजय के सामने चैलेंज होगा कि वह कैसे तालमेल बैठाते हैं। उन्हें केंद्र के साथ संबंधों में भी संतुलन बनाना होगा और राजभवन इसमें बड़ी भूमिका निभाएगा। उनकी दूसरी बड़ी चुनौती होगी राज्य की वित्तीय स्थिति को संभालते हुए चुनावी वादों को पूरा करना।

दबाव में अर्थव्यवस्था । सत्ता संभालते ही उन्होंने 200 यूनिट फ्री बिजली और स्पेशल टास्क फोर्स के गठन का आदेश दे दिया। उन्होंने यह भी कहा कि DMK सरकार 10 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज छोड़ गई है। आंकड़े बताते हैं कि 2024-25 के दौरान सब्सिडी पर 52,603 करोड़ रुपये के खर्च के साथ तमिलनाडु देश में दूसरे नंबर पर था। फ्रीबीज की वजह से इकॉनमी पर दबाव है। विजय ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र लाने की बात कही है। पारदर्शिता के लिए यह अच्छा कदम होगा।

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