जयपुर में निजी अस्पतालों में सेवाएं बहाल, डॉक्टरों की सुरक्षा पर पुलिस का भरोसा

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जयपुर के निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में डॉक्टरों ने सोमवार को सेवाएं फिर से शुरू कर दीं। पुलिस ने डॉक्टरों और उनके परिवारों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। एक डॉक्टर के परिवार के साथ हुई कथित मारपीट की घटना की निष्पक्ष जांच का वादा किया गया है। हालांकि, राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजना का बहिष्कार जारी रहेगा।

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जयपुर, 10 मई (पीटीआई) जयपुर में निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में डॉक्टरों ने सोमवार को अपनी सेवाएं फिर से शुरू कर दीं। यह फैसला तब लिया गया जब पुलिस ने डॉक्टरों और उनके परिवारों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया और एक डॉक्टर के परिवार के साथ हुई कथित मारपीट की घटना की निष्पक्ष जांच का वादा किया। हालांकि, राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजना का बहिष्कार जारी रहेगा।

दरअसल, जयपुर के डॉक्टर एक वकील समूह द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में डॉक्टर सोनदेव बंसल के परिवार के साथ कथित मारपीट, धमकाने और दुर्व्यवहार के विरोध में हड़ताल पर थे। इस मामले में बंसल के परिवार की शिकायत पर शनिवार को अशोक नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स सोसाइटी (PHNHS) और मेडिकल प्रैक्टिशनर्स सोसाइटी (MPS) जैसे विभिन्न चिकित्सा संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की। उन्होंने उन्हें घटना के बारे में बताया। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि वकीलों के एक समूह ने डॉक्टर की जमानत सुनवाई के दौरान भी धमकी, दबाव और बाधा डालकर डर का माहौल बनाया था। उन्होंने डॉक्टरों और उनके परिवारों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की।

प्रतिनिधियों ने एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की भी मांग की, जिसे पुलिस कमिश्नर ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही, सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय करने का भी वादा किया।

इस आश्वासन के बाद, जयपुर मेडिकल एसोसिएशन हॉल में चिकित्सा संगठनों की एक संयुक्त बैठक हुई। इसमें मरीजों को हो रही असुविधा को देखते हुए हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया गया। संगठनों ने कहा कि प्रशासन के आश्वासन के बाद जयपुर के निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में सामान्य सेवाएं तत्काल प्रभाव से फिर से शुरू हो जाएंगी।

हालांकि, चिकित्सा समुदाय में इस घटना को लेकर चिंता और गुस्सा बना हुआ है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसी घटना दोबारा हुई तो वे फिर से विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।

दूसरी ओर, राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजना का बहिष्कार पूरे राज्य में जारी रहेगा। इसके पीछे योजना में अनसुलझे मुद्दे और अनियमितताएं बताई गई हैं। संगठनों ने कहा कि राज्य सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला है, जिससे हितधारकों में असंतोष बना हुआ है।

यह घटना डॉक्टरों के काम करने के माहौल और सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। निजी अस्पतालों के बंद रहने से आम लोगों को काफी परेशानी हुई थी। पुलिस के आश्वासन के बाद ही सेवाएं बहाल हो पाई हैं। लेकिन डॉक्टरों की चिंताएं अभी पूरी तरह से दूर नहीं हुई हैं। वे भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस सुरक्षा उपायों की उम्मीद कर रहे हैं।

राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजना को लेकर भी डॉक्टरों में नाराजगी है। उनका कहना है कि इस योजना में कई खामियां हैं, जिन पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। जब तक इन मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक वे इस योजना का बहिष्कार जारी रखेंगे। यह स्थिति सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ा सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि वे मरीजों के हित में काम करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें भी सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलना चाहिए।

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