मेडिटेशन ने सिखाया संयम, बदल गया जीवन का नज़रिया

Contributed byशीतल वर्मा|नवभारतटाइम्स.कॉम

ध्यान के नियमित अभ्यास से जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। मन की एकाग्रता बढ़ी है और ऊर्जा सही दिशा में लगने लगी है। सुख-दुख की स्थितियों में संयम रखना संभव हुआ है। एक करीबी व्यक्ति द्वारा ब्लॉक किए जाने पर भी गुस्सा नहीं आया। शांत रहने से स्थिति संभल गई।

meditation lifes perspective changed with self control and mental control

पिछले पांच-छह महीनों से मैं नियमित रूप से ध्यान (मेडिटेशन) का अभ्यास कर रहा हूं, और आज मैं इसके सकारात्मक परिणामों को अपने भीतर स्पष्ट रूप से महसूस कर सकता हूं। इस साधना का सबसे बड़ा ‘हासिल’ यह है कि अब मेरा मन बहुत जल्दी एकाग्र हो जाता है। अब अपनी ऊर्जा को सही दिशा में और सही कार्यों में लगाना मेरे लिए बहुत आसान हो गया है।

सबसे बड़ी उपलब्धि जो मैंने महसूस की, वह है सुख और दुख की स्थितियों में खुद को संयमित रखना। इसी संदर्भ में एक दिलचस्प घटना साझा करना चाहूंगा। हाल ही में मेरे एक करीबी व्यक्ति ने, जो मुझसे उम्र और अनुभव दोनों में बड़े हैं, मुझे सिर्फ इसलिए ब्लॉक कर दिया क्योंकि मैं एक हफ्ते तक फोन नेटवर्क क्षेत्र से बाहर था। जब मैं वापस आया, तो मैंने दूसरे नंबर से फोन कर उनका हाल-चाल पूछा, लेकिन उन्होंने ब्लॉक करने का कोई वाजिब कारण नहीं बताया। ऐसी स्थिति में अक्सर इंसान को गुस्सा आता है, लेकिन मैंने न तो कोई प्रतिक्रिया दी और न ही कोई रोष जाहिर किया।

कुछ दिनों बाद उन्होंने मुझे अनब्लॉक कर दिया। मुझे लगा कि शायद वह इस इंतजार में थे कि मैं गुस्से में उन्हें कुछ भला-बुरा कहूंगा। लेकिन, मेरा शांत रहना ही उनके उकसावे के खिलाफ मेरा सबसे बड़ा 'डिफेंस' बना। यह सब सिर्फ इसलिए संभव हो पाया क्योंकि मेडिटेशन ने मुझे अपने मन को वश में करना सिखा दिया है। वास्तव में, मानसिक नियंत्रण ही सबसे बड़ी जीत है।

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