लंबे समय तक पूरे ऊर्जा क्षेत्र की सबसे कमजोर कड़ी मानी जाने वाली देश की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) ने दमदार वापसी की है। वित्त वर्ष 2024-25 में डिस्कॉम ने पहली बार 2,701 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। इससे साल भर पहले इन्हें 25,553 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। 10 बरस पहले वित्त वर्ष 2013-14 में इन कंपनियों का घाटा 67,962 करोड़ रुपये तक था।
बदलाव का असर । यह बदलाव केंद्र में मोदी सरकार और विद्युत मंत्रालय द्वारा किए गए सुधारों का नतीजा है। इन से भुगतान, बिजली की लागत और कमाई के बीच अंतर, ज्यादा नुकसान और खराब मीटरिंग जैसी समस्याओं को दूर किया। दो बड़े बदलावों से समझा जा सकता है। पहला, बिजली की लागत और कमाई के बीच का अंतर बहुत कम हुआ है। वित्त वर्ष 2014 में प्रति यूनिट 0.78 रुपये का नुकसान होता था, जो वित्त वर्ष 2025 में घटकर सिर्फ 0.06 रुपये रह गया। दूसरा, कुल तकनीकी और वाणिज्यिक हानि (AT&C) में भी कमी आई। यह वित्त वर्ष 2013-14 के 22.62% से घटकर वित्त वर्ष 2024-25 में 15.04% हो गई।
कई अहम सुधार । भुगतान व्यवस्था में भी सुधार से इसे बल मिला है। वित्त वर्ष 2021 में भुगतान का औसतन समय 178 दिन था, जो वित्त वर्ष 2025 में घटकर 113 दिन रह गया। 2022 में 13 राज्यों पर 1.39 लाख करोड़ रुपये बकाया था, जो इस साल 10 फरवरी तक घटकर सिर्फ 4,109 करोड़ रुपये बचा है। डिस्कॉम की इस बड़ी वापसी के पीछे कई अहम सुधार रहे। 2022 के लेट पेमेंट सरचार्ज रूल्स से बकाया भुगतान पर अनुशासन बढ़ा, जबकि इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट रूल्स 2022 के तहत ईंधन लागत के हिसाब से हर महीने बिजली दरों में बदलाव की व्यवस्था लागू हुई। इसके अलावा रीवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत करीब 20 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की योजना शुरू की गई। दिसंबर 2025 तक 3.9 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। साथ ही, केंद्र ने राज्यों को बिजली सुधार लागू करने पर उनके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का अतिरिक्त 0.5% तक कर्ज लेने की छूट देकर प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन भी दिया।
व्यापक सुधार । ये सुधार सिर्फ बिजली वितरण तक सीमित नहीं रहे। भारत जुलाई 2012 के उस दौर से काफी आगे निकल चुका है, जब दुनिया का सबसे बड़ा ब्लैकआउट हुआ था। तब 20 राज्यों के 60 करोड़ से ज्यादा लोग अंधेरे में डूब गए थे। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। 25 अप्रैल 2026 को भारत ने रेकॉर्ड 256 गीगावॉट (GW) बिजली की मांग को पूरा किया। इस दौरान पीक समय में करीब 22% बिजली सौर ऊर्जा से आई। जनवरी 2026 तक देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 520.51 GW तक पहुंच गई। वहीं बिजली की कमी वित्त वर्ष 2014 के 4.2% से घटकर दिसंबर 2025 तक सिर्फ 0.03% रह गई।
निवेश से बल । 2021 तक लगभग हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया गया। इसके लिए 1.85 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया। 18,374 गांवों का विद्युतीकरण हुआ और 2.86 करोड़ घरों को बिजली कनेक्शन मिले। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति 2014 के 12.5 घंटे प्रतिदिन से बढ़कर 2025 में 22.6 घंटे हो गई। वहीं, शहरों में बिजली आपूर्ति रोजाना 23.4 घंटे तक पहुंच गई। 2014 के बाद से गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता में 180% की वृद्धि हुई है। रेकॉर्ड मांग वाले दिन अकेले सौर ऊर्जा से 60.5 GW बिजली मिली, जबकि सौर, जल और पवन ऊर्जा मिलाकर 76 GW से ज्यादा बिजली दी गई। पीक डिमांड पूरी करने में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 2023 के 10.9% से बढ़कर 2025 में 15.4% हो गई।
सहयोग की दरकार । आज भारत ने रेकॉर्ड मांग के बावजूद स्थिर और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था बना ली है। लगातार सुधार, स्मार्ट मीटरिंग, नवीकरणीय ऊर्जा और मजबूत ग्रिड ढांचे ने वह कर दिखाया है जो कभी असंभव माना जाता था। आज लगभग हर नागरिक तक बिजली पहुंच चुकी है। अब जरूरत है कि राज्य सरकारें भी इसी तरह सुधारों में सहयोग जारी रखें ताकि यह बदलाव हमेशा के लिए मजबूत हो सके।
(लेखक BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं)



