ऊर्जा सुरक्षा संकट: वैश्विक निवेश में बड़े बदलाव, आईईए की रिपोर्ट
ऊर्जा सुरक्षा संकट: वैश्विक निवेश में बड़े बदलाव, आईईए की रिपोर्ट
NewsPoint•
दुनिया ऊर्जा सुरक्षा के बड़े संकट से गुजर रही है। मध्य-पूर्व के संघर्ष ने देशों को नई ऊर्जा आपूर्ति राहें खोजने पर मजबूर किया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह दूसरा बड़ा झटका है। अब देश घरेलू संसाधनों पर अधिक निर्भर होंगे। निवेश सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं और वैकल्पिक मार्गों पर केंद्रित होगा।
नई दिल्ली, 28 मई: मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष ने दुनिया भर के देशों को ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अपनी योजनाओं में बड़े बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट देशों को ऊर्जा के नए रास्ते खोजने और अपने देश में उपलब्ध संसाधनों पर ज्यादा भरोसा करने के लिए प्रेरित कर रहा है। आईईए की 'वर्ल्ड एनर्जी इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2026' बताती है कि मौजूदा ऊर्जा संकट ने दुनिया भर में ऊर्जा में किए जाने वाले निवेश की प्राथमिकताओं को पूरी तरह से बदल दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से आपूर्ति में जो रुकावट आई है, उसने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर देशों के डर को बहुत बढ़ा दिया है। यह स्थिति कुछ साल पहले, 2022 में, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद आए ऊर्जा संकट के बाद आई है। इन दोनों घटनाओं ने दुनिया के ऊर्जा बाजार की अस्थिरता को साफ दिखाया है और निवेश की योजनाओं को प्रभावित किया है।आईईए के कार्यकारी निदेशक डॉ. फातिह बिरोल ने इस रिपोर्ट में अपनी बात रखते हुए कहा है कि दुनिया इस समय ऊर्जा सुरक्षा के सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है। उन्होंने कहा, “हम दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा सुरक्षा संकट के बीच हैं। मुझे लगता है कि यह वैश्विक निवेश रणनीतियों को पूरी तरह बदल देगा, ठीक वैसे ही जैसे 1970 के दशक के तेल संकट के बाद ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिले थे।”
आईईए की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल उत्पादन करने वाले और तेल इस्तेमाल करने वाले, दोनों तरह के देश अब ऊर्जा के अलग-अलग स्रोत और व्यापार के नए रास्ते तलाश रहे हैं। इसके लिए नए पाइपलाइन प्रोजेक्ट और सप्लाई के लिए जरूरी ढांचे तैयार किए जा रहे हैं। कई देश अब बाहर से तेल मंगाने पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अपने देश में मौजूद ऊर्जा संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भविष्य में आने वाले किसी भी वैश्विक संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
एजेंसी का मानना है कि इन लगातार आ रहे संकटों की वजह से आने वाले सालों में ऊर्जा में होने वाले निवेश का मुख्य ध्यान सुरक्षित सप्लाई चेन बनाने, वैकल्पिक रास्तों को खोजने और अपने देश के ऊर्जा संसाधनों को विकसित करने पर रहेगा। इसका मतलब है कि देश अब सिर्फ एक जगह से ऊर्जा लेने के बजाय कई जगहों से ऊर्जा लेने की कोशिश करेंगे और अपने देश में ही ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देंगे।
यह बदलाव इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दुनिया की ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अगर सप्लाई में कोई बड़ी रुकावट आती है, तो इसका असर हर देश पर पड़ता है। 1970 के दशक में भी तेल संकट ने दुनिया को दिखाया था कि ऊर्जा सुरक्षा कितनी अहम है। तब से लेकर अब तक, तकनीक में काफी बदलाव आया है, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आईईए की रिपोर्ट यह भी बताती है कि नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर और पवन ऊर्जा) में निवेश बढ़ रहा है, लेकिन जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला, तेल और गैस) में भी निवेश जारी है। हालांकि, अब इस बात पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है कि जीवाश्म ईंधन का उत्पादन और इस्तेमाल सुरक्षित तरीके से हो और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचे।
कुल मिलाकर, दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। देशों की सरकारें, कंपनियां और आम लोग भी अब ऊर्जा के भविष्य को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। यह बदलाव न केवल ऊर्जा के बाजार को प्रभावित करेगा, बल्कि हमारी जीवनशैली और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डालेगा।