टोल प्लाजा तो चमक रहा, लेकिन सड़क अंधेरे में डूबी

नवभारतटाइम्स.कॉम

गुड़गांव-फरीदाबाद रोड पर रात में अंधेरा छाया रहता है। टोल प्लाजा तक तो रोशनी है, लेकिन आगे सड़क पर स्ट्रीट लाइटें बंद हैं या पोल ही नहीं हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच कम दृश्यता से हादसे का खतरा बढ़ गया है। दोपहिया वाहन चालक और देर रात लौटने वाले लोग परेशान हैं।

gurgaon faridabad road toll shines but road drowned in darkness question on safety of lakhs of commuters

n तरुण तायल, गुड़गांव

गुड़गांव-फरीदाबाद रोड पर टोल प्लाजा तक का हिस्सा इन दिनों रात होते ही अंधेरे में डूब जाता है। शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल इस रोड पर बदहाल स्ट्रीट लाइट व्यवस्था लाखों मुसाफिरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। हालत यह है कि टोल प्लाजा क्षेत्र में प्रॉपर रोशनी नजर आती है, लेकिन उससे आगे व पीछे के कई हिस्सों में सड़क पूरी तरह अंधेरे में डूबी रहती है। तेज रफ्तार वाहनों के बीच कम दृश्यता के कारण कट, मोड़ और सर्विस लेन साफ दिखाई नहीं देते, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर कई जगह स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं, जबकि कुछ हिस्सों में तो लाइट के पोल तक नहीं हैं। देर रात ड्यूटी से लौटने वाले लोग और दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा परेशानी झेल रहे हैं। लोगों का कहना है कि अंधेरे में आपराधिक घटनाओं का डर भी बना रहता है।

एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी : इस मार्ग का जिम्मा लोक निर्माण विभाग के पास है, लेकिन विभाग के पास बजट नहीं है। इस वजह से बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस सड़क की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा? नगर निगम, महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) और लोक निर्माण विभाग (PWD) के बीच जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट स्थिति नजर नहीं आ रही। विभागों के बीच चल रही आपसी खींचतान का सीधा असर आम वाहन चालकों पर पड़ रहा है।

अलग से कोई बजट उपलब्ध नहीं : लोक निर्माण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग के पास फिलहाल नई स्ट्रीट लाइट लगाने या उनके रखरखाव के लिए अलग से कोई बजट उपलब्ध नहीं है। अधिकारी के अनुसार, करीब एक वर्ष पहले GMDA की ओर से गुड़गांव-फरीदाबाद रोड पर डीएलएफ के क्षेत्र में लगभग 1100 नई स्ट्रीट लाइटें लगवाई गई थीं, जबकि करीब 100 पुराने पोलों को भी दुरुस्त कराया गया था। जिनके रखरखाव को लेकर जिम्मा भी जीएमडीए संभाल रहा है। वहीं, मुसाफिरों का कहना है कि करोड़ों रुपये की टोल वसूली करने वाली सड़क पर यदि रात में रोशनी तक सुनिश्चित नहीं हो पा रही, तो यह सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

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