गीतकार योगेश गौड़ का निधन: हिंदी सिनेमा का एक युग समाप्त, अनमोल गीत सदा रहेंगे अमर
गीतकार योगेश गौड़ का निधन: हिंदी सिनेमा का एक युग समाप्त, अनमोल गीत सदा रहेंगे अमर
NewsPoint•
बॉलीवुड के महान गीतकार योगेश गौड़ का निधन हो गया है। उन्होंने लखनऊ से मुंबई आकर फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाई। उनके लिखे गीत 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' और 'जिंदगी कैसी है पहेली' आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं। योगेश ने कई यादगार गीत दिए।
मुंबई, 28 मई: हिंदी सिनेमा के मशहूर गीतकार और लेखक योगेश गौड़ का 29 मई 2020 को बीमारी के चलते निधन हो गया। लखनऊ में जन्मे योगेश ने 16 साल की उम्र में अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई का रुख किया था और 60 व 70 के दशक में अपने लिखे गानों से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। उनके लिखे गीत 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' और 'जिंदगी कैसी है पहेली' आज भी लोगों को भावुक कर देते हैं। योगेश की खासियत थी कि वे अपनी सरल भाषा में गहरी भावनाओं को व्यक्त करते थे, चाहे वह जीवन की अनिश्चितता हो, प्यार हो, उदासी हो या फिर खूबसूरती। उनके जाने से हिंदी सिनेमा के एक युग का अंत हो गया, लेकिन उनके गीत हमेशा लोगों के दिलों में गूंजते रहेंगे।
योगेश गौड़ का जन्म 19 मार्च 1943 को लखनऊ में हुआ था। कम उम्र में ही वे काम की तलाश में मुंबई आ गए थे। फिल्मी दुनिया में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनके लिखे गानों ने लोगों के दिलों को छुआ। 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' और 'जिंदगी कैसी है पहेली' जैसे गाने आज भी सुने जाते हैं और लोगों को बहुत पसंद आते हैं।योगेश की रचनाओं में जीवन के हर रंग देखने को मिलते थे। वे अपनी कविताओं में जीवन की अनिश्चितताओं, प्रेम, उदासी और सुंदरता को बड़ी खूबसूरती से पिरो देते थे। उनके जाने से हिंदी सिनेमा का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है, लेकिन उनके लिखे गीत हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।
उनके कुछ और यादगार गानों में 'रजनीगंधा फूल तुम्हारे', 'कई बार यूंही देखा है', 'रिमझिम गिरे सावन', 'बड़ी सोनी सोनी है' और 'आये तुम याद मुझे' शामिल हैं। उन्होंने ऋषिकेश मुखर्जी और बासु चटर्जी जैसे बड़े निर्देशकों के साथ काम किया। इसके अलावा, उन्होंने टीवी सीरियल्स के लिए भी लेखन का काम किया।
योगेश ने संगीतकार निखिल-विनय की जोड़ी के लिए 'बेवफा सनम', 'चोर और चांद', 'दुलारा' और 'इंग्लिश बाबू देसी मेम' जैसी फिल्मों के लिए भी गाने लिखे थे। हजारों गाने लिखने वाले योगेश को उनके संगीत के क्षेत्र में शानदार योगदान के लिए दादासाहब फाल्के पुरस्कार और यश भारती पुरस्कार से भी नवाजा गया था। एक समय ऐसा भी था जब योगेश के गानों के बिना कोई फिल्म अधूरी मानी जाती थी।