भारत इस समय दुनिया की सबसे ज्यादा गर्म जगहों में से एक है। 76% आबादी सामान्य से अधिक गर्मी के बीच रह रही है। साल दर साल गर्मी की वजह से सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बढ़ता जा रहा है। इसी वजह से सरकार ने अब राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया है।
सामूहिक प्रयास । पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कैबिनेट मीटिंग में सभी मंत्रालयों से कहा कि हीटवेव से लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों व नागरिकों के सामूहिक प्रयास की बात कही है। विभिन्न मंत्रालय अपनी जरूरत के अनुसार कार्ययोजना तैयार करेंगे। मीटिंग की बातों पर तुरंत अमल किए जाने की जरूरत है। हीटवेव अब केवल एक मौसम का मामला नहीं रहा है।
हीटवेव का खतरा । देश के ज्यादातर शहर प्रदूषण, कम हरियाली और खराब प्लानिंग की समस्या झेलते आ रहे हैं। महानगरों में जहां आबादी, पलूशन और कंक्रीट ज्यादा है - मुश्किल और बड़ी है। चूंकि शहर देश की इकॉनमी को गति देते हैं और वहां लोगों का बाहर निकलना जरूरी है, तो उन पर हीट वेव की चपेट में आने का खतरा भी अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनियाभर में 2000 से 2004 की तुलना में 2017 से 2021 के बीच 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या लगभग 85% बढ़ गई थी।
ख्याल रखें । गर्मी को ज्यादा गंभीरता से लेने और सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे में पीएम की सार्वजनिक अपील अहम हो जाती है। उन्होंने गर्मी से होने वाली परेशानियों को नजरअंदाज न करने और दूसरों का भी ख्याल रखने का आग्रह किया है। असल में हीटवेव को किसी राष्ट्रीय आपदा जैसा देखा जाना चाहिए। जिस तरह बाढ़, भूस्खलन या दूसरे संकट के समय लोग एकजुट हो जाते हैं, उसी तरह की जागरूकता और संवेदनशीलता अब चाहिए।
एक्शन प्लान । UN क्लाइमेट चीफ Simon Stiell के अनुसार, भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के पीछे मुख्य वजह क्लाइमेट चेंज है। अभी हालात और बिगड़ने का अनुमान है, इसलिए परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालने के लिए कदम उठाने होंगे। सरकारें अब मिलकर और स्थायी एक्शन प्लान पर काम करें। स्थानीय प्रशासन के स्तर पर जैसी तैयारी सर्दियों या बारिश के लिए की जाती है, उससे ज्यादा गर्मियों के लिए जरूरत है। क्लीन एनर्जी में निवेश और ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना होगा, ताकि आम लोगों को सस्ती और लगातार बिजली मिल सके।



